Jul 22, 2025
आप जानते होंगे कि अंतरिक्ष का तापमान पृथ्वी से पूरी तरह से अलग है। अंतरिक्ष में अत्यधिक गर्मी या अत्यधिक ठंठी वाला तापमान हो सकता है।
Credit: canva
जब यान सूरज की ओर होता है तो उसका तापमान 120 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है। वहीं, जब अंधेरे वाले हिस्से में होता है, तो तापमान -150 जा सकता है।
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ऐसी हालात में यदि अंतरिक्षयान की बाहरी सतह का खास ख्याल न रखा जाए, तो ये कभी भी गर्मी से पिघल या ठंठी से जमकर टूट सकता है।
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अंतरिक्ष में तापमान में उतार चढ़ाव से बचने के लिए अंतरिक्ष यानों में एल्युमीनियम लीथियम अलॉय, टाइटेनियम कार्बन कंपोजिट जैसी धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है।
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बता दें, ये धातुएं न केवल हल्के होते हैं, जबकि तापमान को झेलने में भी सक्षम होते हैं।
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इसके अलावा अंतरिक्षयान के कुछ हिस्से पर हीट शीट का प्रयोग भी किया जाता है, ताकि जब यान पृथ्वी की ओर लौटे तो उत्पन्न होने वाली भयंकर गर्मी को झेल सके।
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वास्तव में जब हीट शीट पृथ्वी की ओर लौटता है, तो वायुमंडल में लौटते समय घर्षण के कारण तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
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इस तापमान से यान को बचाने के लिए उसके निचले हिस्से में हीट शीट लगाई जाती है।
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SpaceX के ड्रैगन यान में PICA-X नाम की सामग्री लगाई गई थी, जो खुद जल जाती है लेकिन यान को सुरक्षित रखती है।
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