Mar 10, 2025
Ankita Pandey
दुनिया के कई देशों में मौसम के हिसाब से दिन और रात के समय में काफी अंतर देखने को मिलता है।
Credit: Canva
ऐसे देश कुछ महीनों के लिए घड़ी के समय को आगे पीछे करते हैं, जिससे दिन की रोशनी का अधिकांश उपयोग किया जा सके।
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इसके कारण लोग अपने काम को एक घंटे पहले पूरा कर लेते हैं और दिन के अतिरिक्त घंटे के कारण ऊर्जा की खपत कम होती है।
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गर्मियों के मौसम में मानक समय से घड़ियों को एक घंटे आगे करने की प्रक्रिया को ही डेलाइट सेविंग टाइम कहा जाता है।
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आमतौर पर डेलाइट सेविंग टाइम (DST) मार्च में प्रारंभ होकर नवंबर के पहले रविवार को समाप्त होता है।
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भारत जैसे देश के लोग इस अवधारणा से अनजान होते हैं क्योंकि इसका उपयोग भारत में नहीं होता है।
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भूमध्य रेखा के आसपास के देश DST का पालन नहीं करते क्योंकि इस क्षेत्र में पूरे साल दिन की अवधि लगभग एक समान रहती है।
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डेलाइट सेविंग टाइम की शुरुआत प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी और ऑस्ट्रिया ने कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के उपयोग को कम करने के लिए की थी।
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