Mar 05, 2026
भारत में सैकड़ों नदियां बहती हैं। जिनका महत्व केवल जलापूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है।
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हर नदी की अपनी एक विशेषता है। लेकिन इसमें एक नदी है, जिसे 'दूध की नदी' और गुप्तगामिनी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इसे दूध की नदी और गुप्तगामिनी के नाम से क्यों जाना जाता है?
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जिस नदी की हम बात कर रहे हैं उसका नाम 'पलार नदी' है। यह दक्षिण भारत की जीवनदायिनी है और इसे दूध कि नदी कहा जाता है।
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पलार नदी का उद्गम कर्नाटक के नंदी हिल्स से होता है। नदी की लंबाई 348 किलोमीटर है। यह पहाड़ी बेंगलुरु के करीब स्थित है।
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शुष्क मौसम में नदी का पानी सतह पर दिखाई नहीं देता और इसकी धारा चमकीली रेत से ढकी होने के कारण सफेद नजर आती है और दूर से दुधिया दिखती है।
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वर्ष के अधिकांश समय में नदी सतह पर सूखी दिखाई देती है। लेकिन इसका प्रवाह पूरी तरह से कभी समाप्त नहीं होता। मानसून के दौरान इसकी धारा रेतीले तल में समा जाती है और भूमिगत तौर पर बहती है, इसलिए इसे गुप्तगामिनी के नाम से जाना जाता है।
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आज भले ही पलार नदी को मौसमी नदी माना जाता है। लेकिन इतिहास में यह दक्षिण भारत के लिए महत्वपूर्ण नदी तंत्र का हिस्सा मानी जाती थी।
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पलार नदी 93 Km कर्नाटक में, 33 Km आंध्र प्रदेश में और 222 Km तमिलनाडु से होकर गुजरते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
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