छात्रों को नई राह दिखाएंगे मुंशी प्रेमचंद की ये बातें, आज ही अपनाएं

Kuldeep Raghav

Oct 08, 2024

​मुंशी प्रेमचंद के विचार​

आशा उत्साह की जननी है। आशा में तेज है, बल है, जीवन है। आशा ही संसार की संचालक शक्ति है।

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​मुंशी जी के मंत्र ​

सोने और खाने का नाम जिंदगी नहीं है, आगे बढ़ते रहने की लगन का नाम ही जिंदगी हैं।

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​आलोचना और बुराई​

आलोचना और दूसरों की बुराइयां करने में बहुत फर्क है। आलोचना करीब लाती है और बुराई दूर करती है।

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​क्रोध ना करें​

​क्रोध मौन सहन नहीं कर सकता हैं। मौन के आगे क्रोध की शक्ति असफल हो जाती है।

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​निराश ना हों​

मुंशी जी कहा करते थे, ​निराशा संभव को अससंभव बना देती है।

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​दूसरों का ख्याल ​

जीवन का वास्तविक सुख, दूसरों को सुख देने में है, उनका सुख छीनने में नहीं।

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​इस फर्क को समझें​

दौलतमंद आदमी को जो सम्मान मिलता है, वह उसका नहीं, उसकी दौलत का सम्मान है।

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​आत्म सम्मान बनाए रखें​

​आत्मसम्मान की रक्षा करना हमारा सबसे पहला धर्म ओर अधिकार है।

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​अन्याय ना सहें​

अन्याय होने पर चुप रहना, अन्याय करने के ही समान है।

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