Oct 01, 2026
उनका पूरा नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था। बाद में उन्होंने जाति से जुड़ा उपनाम “श्रीवास्तव” हटा दिया और “शास्त्री” नाम अपनाया।
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काशी विद्यापीठ से शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि मिली। यही आगे चलकर उनके नाम का हिस्सा बन गई।
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शास्त्री जी महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित थे और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए। उन्होंने असहयोग आंदोलन में भी हिस्सा लिया।
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जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 9 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने।
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1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने “जय जवान, जय किसान” का नारा दिया। यह नारा देश की सुरक्षा और कृषि, दोनों के महत्व को सामने लाता है।
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प्रधानमंत्री के रूप में शास्त्री जी के कार्यकाल में 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ। इस दौरान उन्होंने देश को दृढ़ नेतृत्व दिया।
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भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध समाप्त होने के बाद 10 जनवरी 1966 को ताशकंद में समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इसमें भारत की ओर से शास्त्री जी और पाकिस्तान की ओर से अयूब खान शामिल थे।
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ताशकंद समझौते के अगले ही दिन 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया। वे उस समय सोवियत संघ के ताशकंद में थे।
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लाल बहादुर शास्त्री को मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।
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