May 29, 2025
दिल्ली की चहल-पहल भरी सड़कों के ठीक बाहर असोला और फतेहपुर बेरी के जुड़वां गांव हैं, जो राजधानी के नाइट क्लब बाउंसरों की एक बड़ी संख्या पैदा करने के लिए प्रसिद्ध हैं
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यह जीवन जीने का एक तरीका है। दिल्ली के निजी सुरक्षा कर्मियों में अपने महत्वपूर्ण योगदान के कारण इस गांव ने 'भारत का सबसे मजबूत गांव' का नाम कमाया है।
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इस गांव को 'बाउंसर फैक्ट्री' के नाम से भी जाना जाता है। यहां के लड़कों की जीवनशैली बेहद संयमित है।
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यहां के लड़के नशे से दूर रहते हैं और दूध, दही, फल, सूखे मेवे और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करते हैं। यही डाइट उन्हें शक्ति और ऊर्जा देती है।
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अगर आप Google पर 'भारत या दुनिया का सबसे मजबूत गांव' सर्च करेंगे, तो नतीजे असोला-फतेहपुर बेरी से जुड़े लिंक दिखाएंगे।
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यह बदलाव तब शुरू हुआ जब स्थानीय पहलवान विजय तंवर, भारत की ओलंपिक कुश्ती टीम में जगह पाने से चूक गए, उन्होंने बाउंसर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया।
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उनकी सफलता ने गांव के कई अन्य लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया, और शारीरिक शक्ति को आजीविका में बदल दिया।
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आज, यह अनुमान लगाया जाता है कि दिल्ली के बाउंसरों का एक बड़ा हिस्सा असोला-फतेहपुर बेरी से आता है।
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इन गांवों के युवा स्थानीय अखाड़ों (पारंपरिक कुश्ती के मैदान) में कठोर प्रशिक्षण सत्रों में शामिल होते हैं, जहां वे प्रतिदिन सैकड़ों पुश-अप, सिट-अप और कुश्ती अभ्यास करते हैं।
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