बचपन में छिन गई आंखों की रोशनी, फिर भी नहीं मानी हार, बिना कोचिंग दो बार क्रैक किया UPSC

Ankita Pandey

Jul 07, 2025

​​मेहनत और लगन​​

अगर आपके मन में कुछ करने की इच्छाशक्ति और लगन है तो रास्ते में आने वाली कोई भी कठिनाई रास्ता नहीं रोक सकती है।

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​​प्रांजल पाटिल​​

ऐसी ही एक कहानी प्रांजल पाटिल की भी है, जिन्होंने नेत्रहीन होने के बावजूद भी कभी सपने देखना नहीं बंद किया।

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​​छिन गई आंखों की रोशनी​​

मूल रूप से महाराष्ट्र के उल्हासनगर की रहने वाली प्रांजल पाटिल की आंखों की रोशनी बचपन में ही चली गई थी।

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​​जारी रखी पढ़ाई​​

हालांकि, उनके माता-पिता ने प्रांजल को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया और न ही कभी उनकी पढ़ाई पर रोक लगी।

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​​इस स्कूल से की पढ़ाई​​

प्रांजल ने मुंबई के दादर स्थित श्रीमती कमला मेहता स्कूल से 10वीं और चंदाबाई कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की।

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​​दिल्ली का किया रुख​​

इसके बाद उन्होंने मुंबई के ही सेंट जेवियर कॉलेज से आगे की पढ़ाई पूरी की और फिर दिल्ली आ गई।

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​​यूपीएससी की तैयारी​​

प्रांजल ने जेएनयू से एमए किया और फिर एमफिल के साथ ही यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में लग गईं।

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​​बिना कोचिंग पाई कामयाबी​​

आखिरकार प्रांजल की मेहनत रंग लाई और उन्होंने बिना कोचिंग दो बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी पाई।

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​यूपीएससी में कितनी थी रैंक​

साल 2016 में प्रांजल ने 733वीं रैंक हासिल की थी लेकिन संतुष्ट नहीं थीं। फिर साल 2017 में उन्होंने 124वीं रैंक के साथ सफलता हासिल की।

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