Jun 30, 2023
कुछ कर गुजरने की इच्छा व कड़ी मेहनत से व्यक्ति बड़े से बड़े मुकाम को हासिल कर सकता है। बनारस की तंग गलियों में रहने वाले गोविंद जायसवाल पर ये पंक्ति सटीक बैठती है।
Credit: Facebook/Istock
गोविंद से साल 2006 में महज 22 साल की उम्र में यूपीएससी में 48वीं रैंक हासिल कर परीक्षा क्वालीफाई किया था।
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बता दें गोविंद ने अपनी पढ़ाई हिंदी मीडियम से की है, हिंदी मीडियम से परीक्षा देने वालों में गोविंद ऑल इंडिया टॉपर रहे थे।
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गोविंद ने अपना सपना पूरा करने के लिए जितना संघर्ष किया, उतनी ही मेहनत उनके पिता नारायण ने भी किया है। इसके लिए उन्होंने रिक्शा मालिक से रिक्शा चालक बनना स्वीकार किया था।
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बता दें आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के चलते किसी किसी दिन परिवार को दोनों टाइस सूखी रोटी खाकर बिताना पड़ता था।
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पिता नारायण गोविंद को रिक्शे पर बिठाकर स्कूल छोड़ने जाया करते थे। कई बार बच्चे गोविंद को देखकर रिक्शे वाले का बेटा कहकर ताने दिया करते थे।
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गोविंद ने एक इंटरव्यू के दौरान बताते हुए काफी भावुक हो गए थे कि एक समय ऐसा भी आया जब पड़ोस के लोगों ने अपने बच्चों को उनके साथ खलने के लिए मना कर दिया था, क्योंक वह रिक्शेवाले के बेटे थे।
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गोविंद ने बताया कि, यह उनके लिए सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। पिता की उम्मीद और सपने को लेकर उन्होंने आईएएस की तैयारी शुरू कर दी।
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बता दें साल 2006 में गोविंद ने पहले ही अटेम्प्ट में यूपीएससी की परीक्षा क्वालीफाई कर दिया था।
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