Nov 15, 2025
औरंगजेब और कुछेक मुगल शासकों को छोड़ दिया जाए, तो अकबर से लेकर शाह आलम तक सभी मुगल शासकों ने क्रिसमस मनाया है।
Credit: canva and meta ai
क्रिसमस मध्ययुगीन यूरोप में शुरू हुआ, लेकिन उत्तर भारत में इसकी शुरुआत अकबर के शासन काल से हुई। अकबर ने एक पादरी को आगरा में अपने राजदरबार में आमंत्रित किया।
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आगर इसलिए क्योंकि उस समय में आगरा सबसे आलीशान महानगर था, जिसमें इटली के सुनार, पुर्तगाल और डच के जहाज के मालिक समेत फ्रांस के पर्यटक, व्यापारी और मध्य एशिया एवं ईरान के कारीगरों समेत मध्य पूर्व के विद्वान आगरा का दौरा करते थे।
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चूंकि ये विदेशी क्रिसमस मनाते थे, और पहले के समय में यात्राएं बहुत समय लेती थी, ऐसे में जो जहां होता अपना त्योहार मनाता।
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चूंकि ये विदेशी क्रिसमस मनाते थे, और पहले के समय में यात्राएं बहुत समय लेती थी, ऐसे में जो जहां होता अपना त्योहार मनाता।
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ऐसे में बादशाह अकबर ने एक पादरी को शहर में एक भव्य चर्च बनाने की अनुमति दी थी।
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अकबर के साथ उनका पुत्र जहांगीर भी इस त्योहार को मनाता था, क्योंकि इसमें खुशियां बाटी जाती और खूब मौज की जाती थी, जो जहांगीर को बहुत पसंद था।
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इस दिन ईसा मसीह के जन्म का नाटक का आयोजन किया जाता था, हालांकि 1632 के बाद नाटक बंद कर दिया गया, क्योंकि शाहजहां का पुर्तगालियों से मतभेद हो गया था।
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क्रिसमस की सुबह अकबर अपने दरबारियों के साथ चर्च जाते, जहां उनका स्वागत एक 'बिशप की तरह' होता था, घंटियां बजाई जाती थीं और गीत गाए जाते थे।
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