Jul 02, 2025
समुद्र की गहराई के बारे में तो आपको पता ही होगा, कभी सोचा है इन गहराइयों में पुल के खंभे यानी पिलर कैसे लगाए जाते हैं?
Credit: tnn and canva
समुद्र पर बनने वाले पुलों का निर्माण जमीन पर बनने वाले पुलों से अलग प्रक्रिया है।
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जमीन पर बनने वाले पुलों को आप वहीं पर बना सकते हैं, लेकिन समुद्र पर बनने वाले पुलों को पहले से बनाकर सिर्फ वहां एसेम्बल यानी सेट किया जाता है।
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सिविल इंजीनियरिंग की भाषा में इन्हें 'प्री-कास्ट' स्लैब कहते हैं। पिलर्स पर इन्हीं प्री-कास्ट स्लैब्स को जोड़कर पुल बना लिया जाता है।
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समुद्र पर पुल बनाने से पहले सटीक कैलकुलेशन की आवश्यकता होती है, ताकि उसी हिसाब से पिलर्स को बनाया जा सके, और फिर उन्हें सेट करने में दिक्कत न आए।
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नदियों और समंदर पर पुल बनाने के दौरान पानी के बीच में रखी जाने वाली नींव को 'कॉफरडैम' कहते हैं। ये मैटल (स्टील की बड़ी शीट्स) से बना विशाल ड्रम होता है।
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इन 'कॉफरडैम' को क्रेन की मदद से पिलर्स वाली जगह पर पानी के अंदर रखा जाता है। ये चौकोर या गोलाकार हो सकते हैं। हालांकि पहले मिट्टी की जांच कर ली जाती है
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इनकी बनावट पुल की लंबाई, चौड़ाई, पानी की गहराई और पानी के बहाव के आधार पर तय किया जाता है।
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कॉफरडैम की वजह से पानी इसके आसपास से बह जाता है, यदि कॉफरडैम में पानी भर जाता है तो पाइप्स के जरिये बाहर निकाल लिया जाता है।
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जब मिट्टी या तल दिखाई देने लगती है तो इंजीनियर्स सीमेंट, कंक्रीट और बार्स के जरिये मजबूत पिलर्स तैयार कराते हैं।
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इसके बाद दूसरी साइट पर तैयार किए गए पुल के प्री-कास्ट स्लैब्स को लाकर पिलर्स पर सेट कर दिया जाता है।
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