Oct 30, 2026
यूपी पीईटी परीक्षा में कोई निश्चित या न्यूनतम पासिंग मार्क्स जैसे 33% या 40% पहले से तय नहीं होता है।
Credit: Canva
पीईटी परीक्षा केवल एक एलिजिबिलिटी टेस्ट है। इसके अंकों के आधार पर ही यूपी सरकार की आगामी मुख्य परीक्षाओं के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है।
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यदि किसी उम्मीदवार के कुल मार्क्स शून्य या नेगेटिव में हैं, तो उसे मुख्य परीक्षाओं के लिए पात्र नहीं माना जाता।
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हर भर्ती विज्ञापन के लिए अलग से कटऑफ मार्क्स जारी किए जाते हैं, जो उस पद के लिए रिक्तियों और कुल आवेदकों की संख्या पर निर्भर करते हैं।
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यदि आप सामान्य वर्ग से हैं और आगामी मुख्य परीक्षाओं में निश्चित रूप से शामिल होना चाहते हैं, तो आपको कुल 100 अंकों में से कम से कम 70 से 75+ अंक प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
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इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.25 अंक (यानी 1/4 अंक) काट लिए जाते हैं, इसलिए तुक्का लगाने से बचें।
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इस परीक्षा में रॉ मार्क्स के साथ परसेंटाइल स्कोर भी मायने रखता है। यह दर्शाता है कि आपने परीक्षा में कितने प्रतिशत अन्य उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन किया है।
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यदि परीक्षा एक से अधिक शिफ्ट में आयोजित होती है, तो कठिनाई स्तर को संतुलित करने के लिए आयोग नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का उपयोग करता है।
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यूपी पीईटी स्कोरकार्ड परिणाम जारी होने की तिथि से एक वर्ष के लिए वैध होता है, और इस अवधि के दौरान आने वाली सभी भर्तियों के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
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