Jan 24, 2026
आपने Metal Detector देखा होगा, लेकिन कभी समझने की कोशिश की है कि ये काम कैसे करता है। आखिर ऐसा क्या है कि ये जमीन में दबी ढेरों चीज में से केवल मेटल को पहचान पाता है।
Credit: canva
मेटल-डिटेक्टर टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा है, जिसके इस्तेमाल आराम से लेकर काम और सुरक्षा तक कई कामों में होते हैं।
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एयरपोर्ट, ऑफिस की बिल्डिंग, स्कूल, सरकारी एजेंसियों और जेलों में लगे मेटल डिटेक्टर यह पक्का करने में मदद करते हैं कि कोई भी परिसर में हथियार न लाए।
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कंज्यूमर-ओरिएंटेड मेटल डिटेक्टर दुनिया भर में लाखों लोगों को छिपे हुए खजाने (और बहुत सारा लोहा भी) खोजने का मौका देते हैं।
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मेटल डिटेक्टर विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
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इनमें लगी खास कॉइल (कुंडली) जमीन या वस्तु की ओर एक मैग्नेटिक फील्ड या वेव या तरंग भेजती है।
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इसकी कॉइल जमीन में एक मैग्नेटिक फील्ड भेजती है, जो ज़मीन में दबी धातु को एनर्जी देती है, जिससे वह अपना खुद का कमजोर मैग्नेटिक फील्ड दोबारा छोड़ती है, जिसे डिटेक्टर पकड़ लेता है।
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खास गोल्ड डिटेक्टर सोने को दूसरी धातुओं और मिनरल्स से अलग करने के लिए एडवांस्ड VLF या पल्स इंडक्शन (PI) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी करते हैं।
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इसके बाद एक सुनाई देने वाली बीप या विज़ुअल संकेत के जरिए सोने या कुछ और कंडक्टिव चीज की मौजूदगी का सिग्नल देता है।
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