Jul 01, 2025
जब भी डॉक्टर के एजुकेशन की बात आती है, तो ज्यादातर लोग MBBS के बारे में सोचने लगते है, लेकिन इसके अलावा BAMS और BHMS क्या होता है, कौन करता है, दोनों में क्या है अंतर? आइये जानें
Credit: canva
BAMS यानी 'बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी', 5.5 साल का स्नातक डिग्री प्रोग्राम है, जिसमें पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा के साथ आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी मिश्रण है।
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पीसीबी से अच्छे अंकों से 12वीं के बाद कोई भी छात्र इस कर सकता है, बशर्ते उसे मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट यूजी क्लियर करने की जरूरत है।
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इस कोर्स की फीस तो कॉलेज पर निर्भर करेगी, लेकिन आप 'व्यवसाय विकास अधिकारी, आयुर्वेदिक चिकित्सक, कैटेगरी मैनेजर, रेजिडेंट चिकित्सा अधिकारी के तौर पर भी काम कर सकते हैं।
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BAMS करके आप सरकारी/ निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, आयुर्वेदिक क्लीनिक, स्वयं के व्यवसाय, वेलनेस सेंटर इत्यादि जगह से आप करियर शुरू कर सकते हैं।
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BHMS यानी बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी, भी एक डॉक्टरेट डिग्री है। इस कोर्स की अवधि 5 साल की है।
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BAMS डॉक्टर जहां आयुर्वेदिक चिकित्सा और दवाओं से मरीजों का इलाज करते हैं, वहीं BHMS डॉक्टर होम्योपैथिक चिकित्सा की प्रैक्टिस करते हैं।
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इसमें भी एडमिशन के लिए NEET स्कोर की आवश्यकता होती है। BHMS के बाद आप होम्योपैथिक डॉक्टर, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, निजी चिकित्सक, फार्मासिस्ट, आदि के तौर पर करियर बना सकते हैं।
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BHMS करके आप भारत होम्योपैथिक, एवोनटिक्स सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, पतंजलि आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड, भारत होम्योपैथिक, पॉजिटिव हेल्थ साइंस प्राइवेट लिमिटेड से करियर शुरू कर सकते हैं।
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BAMS और BHMS में से चूंकि BHMS की फीस ज्यादा होने की वजह से सैलरी भी BHMS वालो की ज्यादा होने की संभावना रहती है।
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