Jan 14, 2026
अरुणाचल प्रदेश का नवगठित जिला 'केयी पन्योर' अब भारत का पहला ‘बायो हैप्पी जिला’ बनने जा रहा है।
Credit: canva
एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन ने अरुणाचल प्रदेश के केयी पन्योर जिले में 'बायोहैप्पीनेस' पर एक प्रोजेक्ट शुरू किया है।
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यह कॉन्सेप्ट इसके संस्थापक और दिवंगत कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन ने दिया था। जबकि इस फाउंडेशन की चेयरपर्सन 'सौम्या स्वामीनाथन' है।
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डॉ. स्वामीनाथन के शब्दों में, बायोहैप्पीनेस एक ऐसी खुशहाली और संतुष्टि की स्थिति है जो तब आती है जब बायोडायवर्सिटी को इस तरह से संरक्षित और इस्तेमाल किया जाता है जिससे इंसानों की सेहत, पोषण और रोजी-रोटी बेहतर हो।
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बायोहैप्पीनेस का मतलब जहां लोगों और प्रकृति के बीच गजब का तालमेल हो। उन्होंने अपनी किताब 'इन सर्च ऑफ बायोहैप्पीनेस: बायोडायवर्सिटी एंड फूड, हेल्थ एंड लाइवलीहुड सिक्योरिटी' में इसके बारे में विस्तार से बताया है।
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इस पहल के तहत हजारों की संख्या में पेड़ लगाए गए हैं और उनकी देखभाल की जा रही है, जबकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हर दिन 5.25 मिलियन लीटर पानी रीसायकल करता है।
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ग्रीन एनर्जी की पैदावार बढ़ेगी, जिससे उसकी लगभग 60% जरूरतें पूरी होती हैं।
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ये प्रतियोगी परीक्षा के लिहाज से जरूरी सवाल है, इस अनोखी पहल का मकसद बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन को इंसानों की भलाई के साथ जोड़ना है।
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ये वही राज्य है, जहां भारत में सबसे पहले सूर्य दिखाई देता है। इसे भारत का सबसे पूर्वी राज्य भी कहा जाता है।
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