Nov 04, 2025
कुत्ते के अलावा बिल्ली एक ऐसा जानवर है जिसके दीवानों की संख्या में कमी नहीं है। कई लोगों को बिल्ली पालने का बेहद शौक होता है।
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बिल्ली पर कई तरह की कहावतें और राइम्स बनी हैं। आपने भी कई बार नर्सरी या फिर केजी के सिलेबस में ये कविता सुनी होगी- बिल्ली मौसी-बिल्ली मौसी आओ न...
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मगर क्या आपने कभी सोचा कि बिल्ली को आखिर मौसी क्यों कहा जाता है। बिल्की को चाची, मामी, ताई या फिर आंटी भी तो कहा जा सकता था। फिर सिर्फ मौसी नाम बिल्ली को क्यों मिला?
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इसके पीछे किसी तरह का कोई साइंटिफिक रीजन नहीं है। बिल्ली को मौसी कहने का चलन सदियों से चला आ रहा है और आज भी लोग बिल्ली को मौसी कहते हैं।
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कई भारतीय लोककथाओं में बिल्ली और शेर को एक साथ दिखाया गया है। इसलिये लोग दोनों को आपस में भी जोड़ने लगे। इन कहानियों में बिल्ली को हमेशा शेर की मौसी ही कहा गया है।
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अब सवाल ये कि अगर शेर की मौसी कहा जाता है तो इसका तो ये मतलब होगा कि शेर बिल्ली पर अटैक नहीं करेगा, क्योंकि बिल्ली उसकी मौसी है? तो इसका जवाब है हां... बिल्ली शेर की मौसी सिर्फ कहानियों में ही है मगर ये बात सच है कि शेर बिल्ली पर हमला नहीं करते।
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बिल्ली को शेर की मौसी कहने का दूसरा कारण ये भी हो सकता है कि शेर और बिल्ली का रंग रूप लगभग लगभग एक सा ही होता है। भले ही कद अलग हो मगर दिखते दोनों एक से ही हैं। ये भी एक वजह है कि बिल्ली को शेर की मौसी कहा जाता है।
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इसके इतर ये भी मान्यता है कि पुराने समय में शेरनी अपने बच्चों को बिल्ली के पास भेजा करती थी, जिससे कि वे शिकार करना सीख जाएं। मगर ये कहावत भी है कि बिल्ली ने उन्हें सबकुछ सिखाया मगर पेड़ पर चढ़ना कभी भी नहीं सिखाया।
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जिस तरह शेर को दुर्गा मां का वाहन माना जाता है ठीक उसी तरह से बिल्ली को भी राहु की सवारी माना जाता है। ऐसे में बिल्ली को मारना कठोर पाप होता है। बिल्ली को पवित्र माना गया है।
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बिल्ली और शेर एक ही प्रजाति के होते हैं ये भी एक वजह है कि बिल्ली को शेर की मौसी कहते हैं। दोनों के सिर्फ कद में ही अंतर है। जबकि ये दोनों दिखने में एक से ही होते हैं।
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