Dec 16, 2025
साल 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के समय ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच 6 लेन का एक्सप्रेसवे बनाने की परिकल्पना की गई।
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20 अप्रैल 2001 को ताज एक्सप्रेस अथॉरिटी (TEA) को एक वैधानिक संस्था का दर्जा दिया गया।
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7 फरवरी 2023 को ताज एक्सप्रेस अथॉरिटी यानी TEA और जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेपी ग्रुप) के बीच कंसेशन एग्रीमेंट हुआ।
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सितंबर 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने यमुना एक्सप्रेसवे बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू किया।
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ग्रेटर नोएडा और आगरा के बीच जनवरी 2008 में जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड ने ताज एक्सप्रेसवे का काम शुरू किया।
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ग्रेटर नोएडा और आगरा के बीच बनने वाले एक्सप्रेसवे का नाम ताज एक्सप्रेसवे रखा गया था, जिसे 11 जुलाई 2008 को बदलकर यमुना एक्सप्रेसवे कर दिया गया।
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मई 2011 में गौतमबुद्ध नगर जिले में दनकौर के पास भट्टा और परसौल गांव के किसानों ने जमीन अधिग्रहण को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया, उस समय राहुल गांधी ने किसानों का साथ देने वहां पहुंचे थे।
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9 अगस्त 2012 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यमुना एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया।
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यमुना एक्सप्रेसवे पर 15 जून 2021 को FASTag RFID की शुरुआत हुई। तब से एक्सप्रेसवे पर टोल की वसूली FASTag से की जा रही है।
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