May 02, 2025
22 अप्रैल को पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच जंग के आसार नजर आ रहे हैं।
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भारत की तरफ से पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान इस दबाव में बिलबिला रहा है और तमाम तरह की बयानबाजी कर रहा है। बीच जानते हैं एक ऐसे गांव की कहानी जहां के लगभग 300 परिवारों में हर परिवार का सदस्य सेना में है।
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हमारे देश में एक ऐसा भी गांव है, जिसके हर परिवार में से कोई न कोई एक सदस्य या तो सेना में मौजूदा समय में है या पूर्व में रह चुका है।
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यह गांव महाराष्ट्र में सतारा जिले के कराड तहसील के अंतर्गत आता है। मुंबई-बेंगलुरु हाईवे के पास मौजूद इस छोटे से गांव का नाम ही मिलिट्री आपशिंगे है। सेना में जाना इस गांव की पुरानी परंपरा है।
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इस गांव में करीब 300 परिवार रहते हैं और हर परिवार का कम से कम क सदस्य सेना में जरूर जाता है। परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। यह गांव पुणे से मात्र 130 किमी दूर है।
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मिलिट्री आपशिंगे गांव को उस समय भारत पर राज करने वाले अंग्रेजों ने पहचाना। पहले विश्व युद्ध में इस गांव के 46 बेटे शहीद हुए थे। उनकी बहादुरी की कहानी दिखाने के लिए गांव में एक विजय स्तंभ भी है।
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इस गांव के सबसे ज्यादा सैनिक देश की अलग-अलग इंफैंट्री रेजिमेंट में गए हैं। खासतौर पर मराठा लाइट इंफैंट्री में यहां से सबसे ज्यादा लोग जाते हैं।
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आजादी के बाद से अब तक इस गांव के लगभग 20 अधिकारियों ने भी सेना में अपनी सेवाएं दी हैं। ये 20 अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल और उससे ऊपर की रैंक के हैं।
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1962, 1965, 1971 और कारगिल युद्ध सहित देश के अलग-अलग युद्धों में गांव के 15 सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
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