Oct 15, 2025
Credit: Canva
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मेघालय में स्थित मौलिन्नोंग देश के ही नहीं बल्कि भारत के भी सबसे साफ-सुथरे गांव के रूप में जाना जाता है। यहां सड़के एकदम चकाचक देखने को मिलती है। स्थानीय लोग अपने स्तर पर भी गांव की साफ-सफाई का खास ध्यान रखते हैं।
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असम में स्थित माजुली प्लास्टिक मुक्त लोकाचार और बांस व मिट्टी से बने घरों को आज भी कायम रखा है। इसी वजह से यहां कार्बन फुटप्रिंट कम रहता है। यहां ग्रामीणों द्वारा नियमित तौर पर सड़कों की सफाई करते हैं और गांव में साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं।
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नागालैंड में स्थित खोनोमा गांव में 1990 में पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया और गांव को हरित गांव के रूप में स्थापित किया गया। यहां शनिवार को स्कूली बच्चों को रास्तों पर कूड़ेदान खाली करने के साथ गांव को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया जाता है।
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कर्नाटक में स्थित याना गांव देश के साफ गावों में से एक है। चूना पत्थर की चोटियों से घिरा हुआ यह गांव पर्यटकों में प्रसिद्ध है। भारी पर्यटन के बावजूद यहां वन विभाग द्वारा नियमित सफाई अभियान चलाए जाते हैं। साथ ही पवित्र क्षेत्रों में जूते पहनना प्रतिबंधित है।
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हिमाचल प्रदेश में स्थित नाको भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित है। यहां की हवा स्वच्छ है और सड़कों के किनारे कूड़ेदान लगे हुए हैं। साथ ही 'नाको को स्वच्छ और हरा-भरा रखें' इस तरह के संकेत लोगों को प्रभावित करते हैं। यह गांव देश के सबसे साफ गांवों में से एक है।
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