Jun 18, 2025
किला राय पिथौरा या लाल कोट को दिल्ली के सात ऐतिहासिक नगरों में प्रथम स्थान प्राप्त है। इसका निर्माण सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने 1180 से 1186 ईस्वी के बीच किया और इसे लाल कोट का विस्तार कहा जाता है।
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लाल कोट दिल्ली का सबसे प्राचीन किला माना जाता है, जिसे तोमर वंश के राजा अनंगपाल द्वितीय ने 11वीं शताब्दी के मध्य (1052-1060 ईस्वी के बीच) में बनवाया था। इसकी दीवारें 36 किलोमीटर तक फैली थीं।
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पृथ्वीराज तृतीय ने लाल कोट का विस्तार करते हुए चारों ओर मजबूत पत्थरों की दीवारें और द्वार बनवाए, जिससे यह क्षेत्र "किला राय पिथौरा" कहलाने लगा।
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इतिहासकारों के अनुसार राजा विग्रहराज चौहान ने तोमर वंश से दिल्ली छीनी थी। यहां अनंगपुर गांव, लाल कोट और पत्थर निर्मित बांध तोमर शासन के प्रमाण हैं, जबकि राय पिथौरा का निर्माण चौहान काल की निशानी है।
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राय पिथौरा में मूल रूप से 12 द्वार थे, लेकिन तैमूरलंग के मुताबिक उनकी संख्या 10 थी। इनमें से कुछ दरवाजे जैसे हौजरानी, बरका और बदायूं आज भी यहां मौजूद हैं।
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तोमर और चौहान राजाओं द्वारा लाल कोट के भीतर बनाए गए मंदिरों को आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया और उनके पत्थरों का प्रयोग कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के निर्माण में किया।
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योगमाया मंदिर के पीछे लाल कोट का उत्खनन किया गया, जिससे 11वीं शताब्दी के महल के खंडहर मिले। इनमें स्तंभों पर नक्काशीदार कार्य के अवशेष भी पाए गए।
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दिल्ली सरकार के प्रयासों से किला राय पिथौरा का संरक्षण हुआ। यहां पर पृथ्वीराज चौहान की मूर्ति स्थापित की गई और सुंदर पार्क विकसित किए गए।
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दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित यह संरक्षण केंद्र अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। रात में रोशनी के साथ किले की दीवारें दिल्ली के मध्यकालीन वैभव का भव्य चित्र प्रस्तुत करती हैं।
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