Oct 12, 2025
दुनिया में चीन नंबर वन है। चीन 44 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा (Rare Earth) भंडार के साथ दुनिया में सबसे बड़ा भंडार रखता है। चीन के पास दुनिया का लगभग आधा दुर्लभ मृदा भंडार है। उत्पादन और प्रोसेसिंग दोनों में चीन का दबदबा है।
Credit: Canva
ब्राजील में अनुमानित 21 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा भंडार है। भंडार की दृष्टि से दूसरा स्थान होने के बावजूद, ब्राजील अभी तक अपनी क्षमता का पूरी तरह उपयोग नहीं कर पाया है। देश में खनन को लेकर निवेश की संभावनाएं बनी हुई हैं।
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भारत में करीब 6.9 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा (Rare Earth) भंडार है। भारत समुद्री रेत में 35% वैश्विक हिस्सेदारी रखता है। सरकार अब बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही है जिससे उत्पादन को और बढ़ावा दिया जा सके।
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ऑस्ट्रेलिया इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है। आस्ट्रेलिया के पास 5.7 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा भंडार है। ऑस्ट्रेलिया की खनन परियोजनाएं और राजनीतिक स्थिरता इसे वैश्विक REE बाजार में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनाते हैं।
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रूस की एक बड़ी सैन्य ताकत रूस के पास लगभग 3.8 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा भंडार है। रूस अभी भी अपने REE संसाधनों का विकास कर रहा है। सैन्य और तकनीकी विकास के लिए यह संसाधन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
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वियतनाम में 3.5 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा भंडार है। वियतनाम अपने REE उत्पादन को बढ़ा रहा है ताकि चीन पर आयात निर्भरता को कम किया जा सके, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स और EV सेक्टर के लिए।
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अमेरिका के पास 1.9 मिलियन मीट्रिक टन आरईई भंडार है। अमेरिका के पास पर्याप्त भंडार हैं, फिर भी चीन से भारी मात्रा में आयात करता है। माउंटेन पास खान इसका मुख्य स्रोत है।
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ग्रीनलैंड इस लिस्ट में आठवें नंबर पर है। देश के पास तकरीबन 1.5 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा भंडार है। खनन अभी सीमित है, लेकिन रिसर्चरों का मानना है कि आने वाले समय में ग्रीनलैंड एक बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।
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तंजानिया के पास 890,000 मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा भंडार हैं। खनन अभी शुरूआती चरण में है, लेकिन हालिया खोजों ने निवेशकों की रुचि बढ़ा दी है।
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दक्षिण अफ्रीका में करीब 860,000 मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा भंडार हैं। बड़ी REE मात्रा होने के बावजूद, दक्षिण अफ्रीका में खनन की गति धीमी है। भविष्य में संसाधन विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।
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