May 28, 2025
लाल चंदन की अत्यधिक कीमत और दुर्लभता के कारण इसे "Red Gold" के नाम से जाना जाता है।
Credit: x/istock/canva
भारत में इसकी सबसे अधिक पैदावार आंध्र प्रदेश में होती है, खासकर शेषाचलम के जंगलों (कडप्पा और तिरुपति जिलों) में यह प्रचुर मात्रा में मिलता है।
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लाल चंदन के पेड़ धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जिससे इसकी उपलब्धता कम और कीमत ज्यादा होती है।
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लाल चंदन की लकड़ी से महंगे सजावटी सामान, मूर्तियां और फर्नीचर बनाए जाते हैं।
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विशेष रूप से चीन, जापान और मध्य एशियाई देशों में इसकी भारी मांग है।
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लाल चंदन की कानूनन कटाई और बिक्री पर रोक है, लेकिन तस्करी बड़े पैमाने पर होती है।
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राज्य सरकारों ने तस्करी रोकने के लिए टास्क फोर्स बनाई है, आंध्र प्रदेश में विशेष बल तैनात किए गए हैं जो जंगलों में इन पेड़ों की सुरक्षा करते हैं।
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लाल चंदन IUCN रेड लिस्ट में लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध है। प्राकृतिक संरक्षण के तहत आता है।
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बाजार में लाल चंदन की लकड़ी की कीमत ₹60,000 से ₹70,000 प्रति किलो तक हो सकती है, जो इसके महत्व को दर्शाता है।
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लाल चंदन का उपयोग दवाओं, स्किन केयर प्रोडक्ट्स और आयुर्वेदिक उपचारों में होता है।
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