Apr 23, 2025
महुआ के फूल, बीज और छाल में औषधीय गुण होते हैं। यह आयुर्वेद में पाचन, त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द और खांसी जैसी समस्याओं के इलाज में उपयोग किया जाता है। इससे देशी शराब भी बनाई जाती है, जो आदिवासी क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय है। जानें भारत में कहां-कहां उत्पादन होता है।
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झारखंड में महुआ का व्यापक रूप से उत्पादन होता है। यहाँ के ग्रामीण और आदिवासी लोग महुए के फूल और बीजों का संग्रह कर जीवनयापन करते हैं।
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छत्तीसगढ़ को "धान का कटोरा" कहा जाता है, लेकिन यहां महुआ भी एक महत्वपूर्ण वन प्रोडक्ट है। खासकर बस्तर, कांकेर और दंतेवाड़ा जिलों में इसका उत्पादन अधिक होता है।
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मध्य प्रदेश के रीवा, शहडोल, बालाघाट और मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिलों में महुआ वृक्ष बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं।
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ओडिशा के कालाहांडी, नुआपाड़ा, मलकानगिरी और सुंदरगढ़ जिलों में महुआ का व्यापक उत्पादन होता है और इसे स्थानीय जीवनशैली का हिस्सा माना जाता है।
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महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र, खासकर गढ़चिरौली, चंद्रपुर और नांदेड़ जिलों में महुआ वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
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बिहार के दक्षिणी हिस्सों में, विशेष रूप से गया, नवादा और औरंगाबाद जिलों में महुआ वृक्षों की उपस्थिति देखी जाती है।
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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली जैसे जिलों में भी महुआ वृक्ष पाए जाते हैं, जो वहां की आदिवासी जनसंख्या द्वारा संग्रह किए जाते हैं।
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राजस्थान के उदयपुर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जैसे जनजातीय क्षेत्रों में भी महुआ वृक्षों का उत्पादन होता है।
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छोटा नागपुर पठार क्षेत्र (जो झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के हिस्सों में फैला है) महुआ उत्पादन का पारंपरिक क्षेत्र है।
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इन राज्यों के कुछ आदिवासी क्षेत्रों जैसे आदिलाबाद और खम्मम जिलों में भी महुआ वृक्ष मिलते हैं और पारंपरिक उपयोग में लाए जाते हैं।
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