Jan 05, 2026

बैंक कैसे तय करते हैं आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट?

Richa Tripathi

​इनकम है सबसे बड़ा फैक्टर ​

सबसे पहला और अहम फैक्टर है आपकी आय। बैंक यह देखते हैं कि आप कितनी कमाई कर रहे हैं और आपकी नौकरी कितनी स्थिर है। अधिक इनकम वाले व्यक्ति को बैंक अधिक लिमिट देने में सहज होते हैं, क्योंकि बैंक मानते हैं कि वह व्यक्ति बड़े खर्च को आराम से चुका सकता है। वहीं, अगर आपकी आय कम या अस्थिर है, तो बैंक लिमिट को कम रख सकते हैं।

Credit: canva

​​आपका क्रेडिट स्कोर ​

क्रेडिट स्कोर यानी CIBIL स्कोर यह बताता है कि आपने पहले से उधार और क्रेडिट का उपयोग कैसे किया है। अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है (जैसे 750 से ऊपर), तो बैंक आपको अधिक लिमिट वाला कार्ड देने का ज्यादा भरोसा रखते हैं। वहीं कम स्कोर होने पर बैंक सावधान रहते हैं और लिमिट कम रख सकते हैं।

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​​समय पर बिल चुकाना​​

बैंक यह भी देखता है कि आप समय पर अपने क्रेडिट कार्ड बिल और अन्य लोन की ईएमआई भरते हैं या नहीं। अगर आप नियमित रूप से अपने बिल समय पर चुकाते हैं, तो बैंक आपको भरोसेमंद मानते हैं और आगे चलकर आपकी लिमिट बढ़ा सकते हैं। इसके विपरीत, अगर भुगतान समय पर नहीं होता तो बैंक लिमिट कम कर देते हैं ताकि जोखिम घटे।

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​​खर्च-यूटिलाइजेशन ​​

कई बैंकों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि आप अपनी उपलब्ध लिमिट का कितना हिस्सा उपयोग कर रहे हैं। अगर आप लिमिट का अधिक-से-अधिक सिर्फ छोटा हिस्सा उपयोग करते हैं (जैसे 30% से कम), तो यह संकेत है कि आप जिम्मेदारी से क्रेडिट का उपयोग कर रहे हैं। यह व्यवहार बैंक को प्रेरित करता है कि वे आपकी लिमिट बढ़ा सकते हैं। वहीं उच्च उपयोग (जैसे 80% से ऊपर) जोखिम का संकेत दे सकता है।

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​​मौजूदा कर्ज और देनदारी के स्तर​​

बैंक यह भी देखते हैं कि आपके ऊपर पहले से कितना कर्ज (जैसे होम लोन, पर्सनल लोन) है। अगर आपकी कमाई के मुकाबले कर्ज बहुत अधिक है, तो बैंक समझते हैं कि आपकी वापसी क्षमता कम है और इस वजह से वे क्रेडिट कार्ड की लिमिट कम रख सकते हैं। यह बैलेंस आपकी ऋण-से-आय अनुपात (Debt-to-Income) पर आधारित होता है।

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​​कार्ड के प्रकार और बैंक का जोखिम प्रोफाइल​​

क्रेडिट कार्ड का टाइप या श्रेणी भी लिमिट तय करने में भूमिका निभाता है। कुछ प्रीमियम कार्ड जैसे यात्रा या रिवॉर्ड कार्ड में आमतौर पर अधिक लिमिट दी जाती है, जबकि बेसिक कार्ड में लिमिट कम होती है। बैंक कार्ड की श्रेणी को देखकर ही संभावित खर्च क्षमता का निर्णय लेते हैं।

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​क्रेडिट लिमिट पर पड़ता है असर ​

हालात भी कभी-कभार क्रेडिट लिमिट पर असर डालते हैं। अगर अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता है या बाजार में मंदी का माहौल है, तो बैंक जोखिम कम करने के लिए लोगों की लिमिट को सामान्यतः conservative रख सकते हैं। वहीं अगर आंकड़े सकारात्मक हैं, तो लिमिट को बढ़ाने में बैंक सहज होते हैं।

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​​लिमिट बढ़ाने के तरीके और सुझाव ​

अगर आप चाहते हैं कि आपका बैंक क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाए, तो कुछ सुझाव हैं जिन्हें अपनाकर इसकी संभावना मजबूत की जा सकती है सबसे पहले, समय पर बिल चुकाएं और अपने भुगतान इतिहास को मजबूत बनाएं। इसके अलावा अपनी लिमिट का उपयोग बहुत अधिक न करें और कोशिश करें कि यह 30-40% तक ही रहे। अपनी आय में बढ़ोतरी होने पर बैंक को इसका प्रमाण देना भी मददगार हो सकता है। समय-समय पर बैंक से लिमिट बढ़ाने का अनुरोध (request) देना भी एक तरीका है, खासकर जब आपकी वित्तीय स्थिति बेहतर हो चुकी हो।

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