May 29, 2025

पहले Dalda को कहते थे Dada, जानें इसमें L जुड़ने की दिलचस्प कहानी

Ramanuj Singh

​​डालडा का जन्म​​

डालडा की शुरुआत 1930 के दशक में कासिम दादा नामक व्यापारी ने की, जो वनस्पति घी को देसी घी के सस्ते विकल्प के रूप में भारत में आयात करते थे।

Credit: Dalda/X

​​समय की मांग​​

ब्रिटिश काल में देश की आर्थिक स्थिति खराब थी और देसी घी महंगा था, इसलिए सस्ते विकल्प की जरूरत ने वनस्पति घी को लोकप्रिय बना दिया।

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​​हिंदुस्तान वनस्पति का उदय​​

हिंदुस्तान वनस्पति मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (अब HUL) और कासिम दादा द्वारा वनस्पति घी का आयात किया जाता था।

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​​‘दादा वनस्पति’ के नाम से बिक्री​​

कासिम दादा अपने उत्पाद को दादा वनस्पति नाम से बेचते थे, जो लोगों में लोकप्रिय होने लगा।

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​​यूनिलीवर की दिलचस्पी​​

यूनिलीवर के लीवर ब्रदर्स ने देखा कि वनस्पति घी का बाजार लाभदायक है, इसलिए उन्होंने भारत में खुद उत्पादन शुरू करने की योजना बनाई।

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​​डालडा नाम की उत्पत्ति​​

यूनिलीवर ने ‘Dada’ नाम के अधिकार खरीदे और उसमें ‘L’ जोड़कर ‘Dalda’ बना दिया, ताकि उनकी पहचान भी उत्पाद में झलके।

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​​हर घर की पसंद​​

डालडा 25-30 वर्षों तक भारतीय रसोई का हिस्सा रहा और त्योहारों व विशेष अवसरों पर इसका विशेष उपयोग होता था।

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​​ब्रांड की पकड़​​

डालडा इतना लोकप्रिय हो गया कि यह वनस्पति घी का पर्याय बन गया – लोग किसी भी ब्रांड के घी को ‘डालडा’ कहने लगे।

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​​रिफाइंड तेलों ने डालडा की जगह​​

21वीं सदी की शुरुआत में रिफाइंड ऑयल जैसे सूरजमुखी, सोयाबीन, मूंगफली आदि ने डालडा की जगह लेना शुरू किया।

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