Sep 23, 2025
सितंबर का महीना हरी मटर की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त है। इस समय बुवाई करने से कीट और रोगों का खतरा कम होता है और फसल जल्दी तैयार होती है।
Credit: Canva
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक अर्किल, काशी मुक्ति, और काशी नंदिनी जैसी उन्नत किस्में चुनें। ये किस्में कम समय में पकती हैं और प्रति हेक्टेयर 100-150 क्विंटल उत्पादन दे सकती हैं।
Credit: Canva
बीजों को बुवाई से पहले फफूंदीनाशक (fungicide) से उपचारित करें ताकि बीज रोगमुक्त रहें। प्रति हेक्टेयर 140-150 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है।
Credit: Canva
खेत को अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा और साफ-सुथरा बनाएं। बेड बनाकर ही मटर की बुवाई करें ताकि जड़ें अच्छी तरह फैल सकें।
Credit: Canva
पहली सिंचाई बुवाई के 30-35 दिन बाद करें, जब पौधे फूल देना शुरू करें। दूसरी सिंचाई फलियां बनने के समय करें। ज्यादा पानी न दें, क्योंकि पानी जमा होने से फसल खराब हो सकती है।
Credit: Canva
मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई करें, जो पानी की बचत करता है और फसल के लिए बेहतर है। सरकार मिनी स्प्रिंकलर लगाने पर सब्सिडी भी देती है।
Credit: Canva
समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें ताकि खेत में खरपतवार न बढ़ें। खरपतवार फसल से पोषक तत्व चुरा लेते हैं, जिससे उत्पादन कम हो सकता है।
Credit: Canva
कीट या रोग के लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेकर उचित दवा का छिड़काव करें। समय रहते नियंत्रण करने से फसल का नुकसान रोका जा सकता है।
Credit: Canva
उन्नत किस्में और सही तकनीक अपनाकर लागत को कम रखें। कम समय में अच्छी पैदावार से मुनाफा बढ़ाएं।
Credit: Canva
सितंबर में की गई बुवाई से उत्पादन अधिक होता है, जिससे किसान का मुनाफा भी बढ़ता है। प्रति हेक्टेयर 100 से 150 क्विंटल उत्पादन संभावित है, जो आर्थिक रूप से लाभकारी है।
Credit: Canva
इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स