Oct 08, 2025

हर घर तक कैसे पहुंची बोरोलीन, 96 साल पहले ऐसे हुई थी शुरुआत

Ramanuj Singh

​​स्वदेशी सोच से जन्मा ब्रांड​​

कोलकाता में 1929 में गौर मोहन दत्त ने विदेशी एंटीसेप्टिक क्रीम की जगह भारतीयों के लिए सस्ती और भरोसेमंद क्रीम बनाने का फैसला किया और इसकी शुरुआत की।

Credit: boroline.com

​​किफायती और प्रभावी फार्मूला​​

बोरोलीन बोरिक एसिड, लैनोलिन और जिंक ऑक्साइड से बना, जो स्किन की कई समस्याओं का इलाज करता है।

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​​स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक​​

अंग्रेजों द्वारा महंगी और आयातित क्रीम को टक्कर देने के लिए बोरोलीन ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई।

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​​अंग्रेजों के विरोध के बावजूद सफलता​​

अंग्रेजों ने कंपनी को बंद कराने की कोशिश की, लेकिन बोरोलीन ने हर घर में अपनी जगह बना ली।

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​​हर मौसम और हर जगह उपयोगी​​

कश्मीर की ठंड से लेकर कन्याकुमारी की तेज धूप तक, बोरोलीन हर तरह की त्वचा और मौसम में काम आई।

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​​देश-विदेश में ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन​​

भारत के अलावा ओमान, तुर्की, बांग्लादेश और यूएई में भी बोरोलीन ट्रेडमार्क रजिस्टर है।

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​​देश की आजादी में योगदान​​

1947 में आजादी के जश्न में 1,00,000 से ज्यादा बोरोलीन ट्यूब मुफ्त वितरित की गईं, जिससे यह जनप्रियता का प्रतीक बना।

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​कई उत्पादों का विस्तार​​

90 के दशक के बाद कंपनी ने हेयर ऑयल, एंटीसेप्टिक लिक्विड, हैंड वॉश, सैनेटाइजर समेत कई उत्पाद लॉन्च किए।

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​​स्थिरता का प्रतीक हाथी का लोगो​​

9 दशकों से हाथी वाला लोगो बोरोलीन की पहचान और शुभता का प्रतीक बना हुआ है।

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​​देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता का हिस्सा​​

बोरोलीन ने विदेशी उत्पादों पर निर्भरता घटाई और भारतीय बाजार में अपनी गुणवत्ता और विश्वसनीयता के साथ अपनी जगह बनाई।

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