Oct 08, 2025
कोलकाता में 1929 में गौर मोहन दत्त ने विदेशी एंटीसेप्टिक क्रीम की जगह भारतीयों के लिए सस्ती और भरोसेमंद क्रीम बनाने का फैसला किया और इसकी शुरुआत की।
Credit: boroline.com
बोरोलीन बोरिक एसिड, लैनोलिन और जिंक ऑक्साइड से बना, जो स्किन की कई समस्याओं का इलाज करता है।
Credit: boroline.com
अंग्रेजों द्वारा महंगी और आयातित क्रीम को टक्कर देने के लिए बोरोलीन ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
Credit: boroline.com
अंग्रेजों ने कंपनी को बंद कराने की कोशिश की, लेकिन बोरोलीन ने हर घर में अपनी जगह बना ली।
Credit: boroline.com
कश्मीर की ठंड से लेकर कन्याकुमारी की तेज धूप तक, बोरोलीन हर तरह की त्वचा और मौसम में काम आई।
Credit: boroline.com
भारत के अलावा ओमान, तुर्की, बांग्लादेश और यूएई में भी बोरोलीन ट्रेडमार्क रजिस्टर है।
Credit: boroline.com
1947 में आजादी के जश्न में 1,00,000 से ज्यादा बोरोलीन ट्यूब मुफ्त वितरित की गईं, जिससे यह जनप्रियता का प्रतीक बना।
Credit: boroline.com
90 के दशक के बाद कंपनी ने हेयर ऑयल, एंटीसेप्टिक लिक्विड, हैंड वॉश, सैनेटाइजर समेत कई उत्पाद लॉन्च किए।
Credit: boroline.com
9 दशकों से हाथी वाला लोगो बोरोलीन की पहचान और शुभता का प्रतीक बना हुआ है।
Credit: boroline.com
बोरोलीन ने विदेशी उत्पादों पर निर्भरता घटाई और भारतीय बाजार में अपनी गुणवत्ता और विश्वसनीयता के साथ अपनी जगह बनाई।
Credit: boroline.com
इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स