world environment day poem in hindi: विश्व पर्यावरण दिवस पर इन कविताओं में छिपा है अनमोल संदेश

world environment day poem in hindi: विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया भर में 5 जून को मनाया जाता है। इस दिन लोग उन कविताओं के जरिए भी संदेश भेजते हैं जो लोगों को जागरूक करती है।

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world environment day poem in hindi/विश्व पर्यावरण दिवस पर कविताएं  

world environment day poem in hindi: हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है जिसका मकसद लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। वर्ष 972 में पहली बार 5 जून को संयुक्त राष्ट्र के तत्‍वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था, और उसके बाद से हर साल इसी तारीख को यह खास दिन मनाया जाता है।

5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस को लोग इस मौके पर अपने अपने खास अंदाज में लोगों को विश करते हैं बधाई देते है। आप इस मौके पर कविताओं के जरिए भी यह संदेश दे सकते है। हर कविता पर्यावरण को अक्षुण्ण रखने और भावी पीढ़ी के लिए संजोकर रखने का संदेश देती है। 

paryavaran diwas par kavita hindi mein

1, वृक्ष लगाकर इस धरती को
आओ स्वर्ग बनाएं

हरा भरा सोना है जंगल
इसे न हरगिज काटें
कॉेक्रीट का जाल बिछाकर
नहीं धरा को पाटें
ये तो शिव का वह स्वरूप जो
हरते सदा अमंगल
स्वच्छ हवा औ‘वर्षा का जल
देते हमको जंगल
करते जो खिलवाड़ प्रकृति से
उनको सबक सिखाएँ

नदियाँ, ताल, नहर, बाँधों को
मिलकर स्वच्छ बनाना
जल है प्राणाधार हमारा
मिलकर इसे बचाना
रहे प्रदूषण मुक्त धरा यह
और गगन यह अपना
रोग रहित जीवन जीने का
बीड़ा चलो उठाएं

समझें मित्र प्रकृति को अपना
इसका रूप मनोहर
आने वाली नस्लों की है
पर्यावरण धरोहर
जल में, थल में, नभ में देखें
कई जीव हैं ऐसे
संख्या बल में बहुत विरल हैं
या विलुप्त हैं जैसे
होत हुए विलुप्त प्राणियों
का जीवन सरसाएं

(मनोज जैन 'मधुर')

पर्यावरण दिवस पर कविता, पर्यावरण दिवस पर कविता ह‍िंदी में

2.हरे पेड़ जो एक तुम काटे
हत्या करके जुल्म ही बांटे।
लाखो पेड़ रोज हैं कटते
सौंदर्य वन का ऐसे घटते।।
पर्यावरण को आप बचाओ
हर कोई एक पेड़ लगाओ।
जल पवन वन उपवन सोना
मंहगा कितना इसको खोना।।
आओ अब इतिहास को देखें
उस सुंदर मधुमास को देखें ।
हम अब काहे भटक गये हैं
करना क्या प्रयास को देखें।।
मौशम का बदला मिजाज है
टूटता हिमगिरि का ताज है ।
धू – धू कर सूरज है जलता
जल स्तर हुआ मोहताज है।।
चिंतन इसकी बहुत जरूरी
यह समझो सबकी मजबूरी।
पर्यावरण और यह प्रदूषण
मन से समझें इसको पूरी।।
कुछ तो अपना फर्ज निभाओ
अपने जनम का कर्ज निभाओ ।
प्रकृति छटा को नष्ट न करना
धर्म को अपने भ्रष्ट न करना।।

विश्व पर्यावरण दिवस पर कविता

( बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा ‘बिन्दु’)

3.मुन्ना चर्चे हर दिन सुनता,
पर्यावरण प्रदूषण के।

बोला एक दिन, बापू-बापू,
दिल्ली मुझे घुमा लाओ।
ध्वस्त हो गई अगर कहीं तो,
कब घूमूंगा बतलाओ।
दिल्ली के बारे में बातें,
सुनते मुंह से जन-जन के।

विश्व पर्यावरण दिवस पर ह‍िंदी कविता

आज खांसती दिल्ली बापू,
कल मुम्बई भी खांसेगी।
परसों कोलकाता चेन्नई को,
भी यह खांसी फांसेगी।
पैर पड़ रहे हैं धरती पर,
रावण के, खर दूषण के।

नष्ट नहीं हो इसके पहले,
मुम्बई मुझे घुमा देना।
कोलकाता कैसा है बापू,
दरस परस करवा देना।
चेन्नई चलकर वहां दिखाना,
हैं धरोहरें चुन-चुन के।

बापू बोले सच में ऐसी,
बात नहीं है रे मुन्ना।
इतनी निष्ठुर नहीं हुई है,
अपनी ये धरती अम्मा।
फर्ज निभाकर पेड़ लगाएं,
रोज हजारों गिन-गिन के।

पेड़ लगाकर धूंआ मिटाकर,
अपनी धरा बचा लेंगे।
जहर नहीं बढ़ने देंगे हम,
पेड़ नहीं कटने देंगे।
पर्यावरण बचा लेंगे हम,
आगे बढ़कर तन-तन के।

(प्रभुदयाल श्रीवास्तव)

पर्यावरण दिवस पर कविताएं

4. हमको प्राणों से प्यारी यह धरती है
चांद तारों से न्यारी यह धरती है
खुदा ने तो खुद झोलियां इसकी भर दीं
कुदरत ने भी नेहमतें भेंट कर दीं
धानी सी साड़ी में लिपटी यह नारी
स्वर्ग ने उतारी यह धरती है
यहाँ ताप, ठंडक, हवा, पानी मिलता
तभी जिं़दगी का पौधा पनपता
वातावरण की छतरी के नीचे
रवि से न हारी यह धरती है
कभी न थकी है सतत चल रही है
जिसे पालती है, वही छल रही है
खुद अपनी ही संतान, करती है अपमान
अपनों से हारी यह धरती है।
धरती की दौलत को किसने उजाड़ा
वातावरण के कम्बल को फाड़ा
रूप बिगाड़ा चेहरा उघाड़ा
अपनों की मारी यह धरती है।
फटे जा रहे हैं ओजोन के छाते
सूरज की गर्मी से अब न बचाते
अन्दर से जलती, बाहर से तपती
बलखती बेचारी यह धरती है
दूषित हवाएं विषैली फिजायें
घुटती है सांसें यह किसको बतायें
अरे लाडलो! होश में अब तो आओ
माता तुम्हारी यह धरती है।

( उर्मिल सत्यभूषण)

5. कुछ लोग बाँध बन गए नदियों पर
कुछ लोगों ने धुएँ से ढक दिए जंगल
कुछ मास्क पहन कर निकले सड़कों पर
कुछ लोग दूरबीन से देखने लगे
यूनियन कार्बाइड और चेरनोबिल की चिमनियाँ

चीखने-चिल्लाने लगे कुछ लोग
बचाइए, पृथ्वी को बचाइए
बचाइए, धरती पर मनुष्य का जीवन

कुछ लोग
संज्ञाशून्य पृथ्वी से पूछने लगे :
नक्षत्रों के बीच धुएँ के अक्षरों में
किसने लिख दिया तुम्हारा नाम

कुछ लोग
पृथ्वी के पर्यावरण पर बोलते हुए
चुपचाप बचा गए एक-दूसरे को ।

(राजा खुगशाल)

environment day poem in hindi

6.मुस्कुराते हुये, सरसराते हुये, जी लुभाते
पेड़-पौधे बहुत काम आते
लाल मणियां ये पुखराज पीले
पन्ने, हीरे और नीलम ये नीले
जगमगाते हुये, टिमटिमाते हुये फूल भाते
पेड़-पौधे बहुत काम आते
आम जामुन ये हरियाले तरुवर
नीम पीपल, जटाधारी बरगद
कहते आओ ज़रा, चैन पाओ जरा यूं बुलाते
पेड़-पौधे बहुत काम आते
सेब खूबानी लीची मौसम्मी
आम अमरूद, केले नारंगी
फल कई रस से भरे, मीठे सूखे हरे हम हैं खाते
पेड़ पौधे बहुत काम आते
तन से, बीजों से, पत्तों, जड़ों से
अपने फूलों से, अपने फलों से
कुछ खिलाते हुये, कुछ पिलाते हुये, वो जिलाते
पेड़-पौधे बहुत काम आते
अपनी गहरी जड़ों से मृदा को
कस के पकड़े हुये है धरा को
मेघ भींचे हुये, नेह से सींचे हुये, बरस जाते
पेड़-पौधे बहुत काम आते
है बसेरे यहाँ चिड़ियों के
नीड़ कोयल, औ तोते, बयों के
चहचहाते हुये, किलकिलाते हुये गूंज जाते
पेड़-पौधे बहुत काम आते
आदमी को जिलाने ये वाले
भूमि पर स्वर्ग लाने ये वाले
बेवजह कट गये, बेवजह लुट गये मार खाते
पेड़ पौधे बहुत काम आते
कितने ऊंचे है फिर भी झुके है
आदमी के नमन को रुके है
गर्व करना नहीं, डींग मारना नहीं ये सिखाते
पेड़-पौधे बहुत काम आते
आदमी होश में लौट आओ
जीना है गर तो हमको बचाओ
पेड़ मत काटना, पौधों को पालना रट लगाते
पेड़-पौधे बहुत काम आते।

( उर्मिल सत्यभूषण)

environment day hindi poems

7. बच्चों को देता हूं
स्कूल में भाषण

पर्यावरण दिवस है
बच्चो !
पानी दूषित नहीं करना
हवा गंदी नहीं करनी
बेवजह शोर नहीं मचाना
पृथ्वी हमारी माँ है
इसको बचाना

बच्चे सुनते
शोर मचाते

स्कूल से छुट्टी होने के बाद
खेतों में जाकर
मां-बाप के साथ
खेतों में
कीटनाशक
दवाइयां छिड़काते।

(अमरजीत कौंके) 

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