फैजुल पर नाज क्यों ना हो, कोविड मरीजों के लिए तोड़ दिया रोजा, बोले- अल्ला सब समझता है

प्रयागराज के फैजुल पर नाज क्यों ना हो। कोरोना महामारी के इस दौर में जब कुछ लोग अपने जेबें भरने में लगे हैं तो फैजुल रमजान के महीने में रोजे को ना रख कोरोना मरीजों की मृत शरीर को श्मशान तक पहुंचाते हैं।

फैजुल पर नाज क्यों ना हो, कोविड मरीजों के लिए तोड़ दिया रोजा, बोले- अल्ला सब समझता है
प्रयागराज के रहने वाले हैं फैजुल  |  तस्वीर साभार: IANS

प्रयागराज। कोरोना काल के इस दौर में रिश्तों की भी पहचान हो रही है। एक तरफ इंसानियत के दुश्मन लोगों की लाचारगी का फायदा उठाने की कोशिश से बाज नहीं आ रहे हैं तो दूसरी तरफ ऐसे लोग भी जो जमीन पर किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। जिस घटना का जिक्र करने जा रहे हैं उसका संबंध यूपी के प्रयागराज से है। प्रयागराज के रहने वाले फैजुल एंबुलेंस चलाते हैं और इस समय कोविड की वजह से जान गंवा चुके लोगों को श्मशान तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। 

रोजा रखता तो मदद कैसे कर पाता
इस समय रमजान का महीना चल रहा है और मुस्लिम समाज से जुड़े लोग रोजा रखते हैं। लेकिन फैजुल का कहना है कि उनका अल्लाह सबकुछ समझता है कि वो क्या कर रहे हैं। अतरसुइया के रहने वाले बिना किसी शुल्क के कोरोना मरीज के मृत शरीर को ना केवल श्मशान तक ले जाते हैं बल्कि अंतिम क्रियाकर्म भी करते हैं। फैजुल कहते है कि वो किसी को परेशान होते नहीं देखना चाहते। वो हर एक की मुश्किल के दौर में मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं, ऐसा करने से उन्हें बहुत चैन मिलता है।  

शादी कर लेता तो यह सब कैसे करता

यह मुश्किल समय है, जब उनके पास किसी तरह की कॉल आती है वो झटपट मदद के लिए निकल पड़ते हैं और इस तरह के हालात में रोजा रखना मुश्किल होता है। फैजुल कहते हैं कि उन्होंने  किसी से पैसे नहीं मांगे। अगर कोई देता है तो ही पैसे लेते हैं। फैज़ुल ने सिंगल रहने के लिए चुना है। अगर मैं सांसारिक चीजों में शामिल हो जाता हूं तो मेरा काम बाधित हो सकता है, इसलिए मैं शादी नहीं करना चाहता।उन्होंने एक गाड़ी पर शवों को फंसाने के साथ शुरुआत की और बाद में एम्बुलेंस खरीदने के लिए कर्ज लिया।

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