मां से लिपटकर रोने लगा आईपीएस बेटा, 8 महीने बाद मिलकर बोला- 'अब कभी नहीं छोडूंगा'

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Updated Jul 25, 2019 | 18:39 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

2004 बैच के आईपीएस अधिकारी अविनाश जोशी अपनी मां को दर्शन कराने के बहाने उज्जैन ले गए और वहां मां को बिना कुछ बताए अकेला छोड़कर चले गए। इसके बाद मां तारा आश्रम में रहने लगी

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मां को छोड़कर चला गया था आईपीएस बेटा (प्रतीकात्मक तस्वीर)  |  तस्वीर साभार: Getty Images
मुख्य बातें
  • उज्जैन में मां को दर्शन कराने ले गया था
  • 2004 बैच का आईपीएस अधिकारी है अविनाश
  • आश्रम संचलाक ने अविनाश को मां से मिलने के लिए किया प्रेरित

उज्जैन: बेटे के जन्म की खुशी में पूरे घर में उत्सव का माहौल होता है। परिवार और रिश्तेदारों में खूब मिठाईयां बटती हैं। मां- बाप बड़े लाड- प्यार से बेटे को पालन- पोषण करते हैं, अच्छी शिक्षा मुहैया कराने का प्रयास करते हैं, इस उम्मीद में कि बेटा जब पढ़- लिखकर बड़ा होगा तो मां- बाप के बुढ़ापे का साहारा बनेंगे। वहीं किसी भी बेटे या बेटी के जन्म से लेकर बड़े होने तक उसके पालन- पोषण में सबसे अधिक योगदान उसकी मां का होता है, लेकिन सोचिए जब वही बेटा बड़ा होता है और अपने पैरों पर खड़़ा हो जाता है तो वह उसका साहारा बनने के बजाए उसको बेसहारा कर देता है।

जी हां ये सब सुनकर दुख होता होगा, लेकिन इसे ही कहते हैं संसार का परिवर्तन। एक ऐसी ही भावुक करने वाली घटना सामने आई है जहां पर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक अधिकारी ने अपनी मां को बेसहारा छोड़कर चला गया।

2004 बैच का आईपीएस अधिकारी था बेटा
रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी दिल्ली के निवासी अविनाश जोशी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 2004 बैच का अधिकारी हैं। अविनाश ने दिसंबर 2018 में अपनी मां के साथ उज्जैन आए थे। इस दौरान अविनाश अपनी मां तारा को होटल में छोड़कर चले गए। अविनाश ने मां को छोड़कर जाते वक्त जाने का कोई कारण नहीं बताया। बेचारी मां, बेसाहारा हो गई और बेटे के इंतेजार में बैठी रही। 

होटल में बिताया समय
अविनाश की मां तारा ने एक महीने का वक्त होटल में गुजारा, इस उम्मीद में कि बेटा एक दिन आएगा और उसे अपने साथ लेकर जाएगा। एक महीने के बाद अविनाश की मां का पैसा खत्म हो गया। इसके बाद होटल संचालक ने पूरी घटना जिला अधिकारी को बताई। 

प्रशासन ने बढ़ाया मदद का हाथ
मामले की जानकारी जैसे ही जिला अधिकारी को हुई उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया की वह तारा के लिए उचित इंतजाम करें। इसके बाद अपर जिलाधिकारी (एडीएम) और महिला सशक्तिकरण अधिकारी ने तारा को वन स्टाफ सेंटर में भेज दिया। हालांकि सेंटर में महिलाओं को ज्यादा वक्त नहीं रखा जा सकता था, इसलिए उन्हें सेवाधाम आश्रम में ट्रांसफर कर दिया गया।

8 महीने बाद आया बेटा
अपनी मां तारा की स्थिति के बारे में जानकर अविनाश पूरे आठ महीने बाद आया और उनको अपने साथ घर ले गया। बेटे से मिलने के बाद मां तारा गेल लग खूब रोई औऱ बेटे से पूछा कि क्यों छोड़कर चला गया था? मां की बात सुनकर अविनाश की आंखें भर आई और उसने कहा कि वह कभी अब छोड़कर नहीं जाएगा।  मां अब अपने बेटे के साथ बहुत खुश है और बेटा अपनी मां का बहुत अच्छे से ख्याल रख रहा है। 

बेटे को हुआ गलती का एहसास
रिपोर्ट के अनुसार, अविनाश की पहली पोस्टिंग नक्सल प्रभावित इलाके में हुई थी। उसने कहा कि उसकी मां को जान का खतरा है, इसलिए वह बिना कुछ बताए चला गया था। अविनाश ने इसके बाद अपनी मां से मिलने का भी प्रयास नहीं किया। मां से मिलने पर अविनाश ने कहा कि कभी-कभी सबकुछ अपने हाथ में नहीं होता इसलिए ऐसा कदम उठाना पड़ गया था।

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