ऐसा रेलवे स्टेशन जहां IAS की तैयारी करने वाले छात्र सुबह-शाम आकर करते हैं पढ़ाई, वजह है दिलचस्प

Sasaram Railway Station: आपने कई ऐसे महापुरुषों के बारे में सुनो होगा, जिन्होंने स्ट्रीट लाइट में या फिर रेलवे स्टेशनों की लाइट में पढ़कर सफलता को हासिल किया है। देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम इसके जबरदस्त उदाहरण हैं। जो अखबार बेचकर अपने घर का पेट भी पालते थे और पढ़ाई कर देश के राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे।

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रेलवे स्टेशन पर पढ़ाई करते हैं छात्र  |  तस्वीर साभार: Twitter
मुख्य बातें
  • बिहार का सासाराम रेलवे स्टेशन
  • सुबह शाम सैकड़ों छात्र होते हैं इकट्ठा
  • प्रतियोगी परीक्षा की करते हैं तैयारी

Sasaram Railway Station: कहते हैं कि जिसमें पढ़ने का जज्बा होता है, वह किसी भी परिस्थिति में पढ़कर IAS अधिकारी बन सकता है। आपने कई ऐसे महापुरुषों के बारे में सुनो होगा, जिन्होंने स्ट्रीट लाइट में या फिर रेलवे स्टेशनों की लाइट में पढ़कर सफलता को हासिल किया है। देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम इसके जबरदस्त उदाहरण हैं। जो अखबार बेचकर अपने घर का पेट भी पालते थे और पढ़ाई कर देश के राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी ज्यादा वायरल हो रही है। 

यह तस्वीर बिहार के सासाराम रेलवे स्टेशन की है। इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि सैकड़ों छात्र एक साथ प्लेटफॉर्म पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। तस्वीर को रेलवे के एक अधिकारी Ananth Rupanagudi ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। इसके साथ उन्होंने तस्वीर को लेकर जानकारी भी साझा की है। उन्होंने बताया कि बिहार के सासाराम रेलवे स्टेशन पर हर रोज सुबह और शाम सैकड़ों छात्र इकट्ठा होते हैं। दो घंटे के लिए ये छात्र प्लेटफॉर्म नम्बर 1 और प्लेटफॉर्म नंबर दो को 'स्टडी क्लास' के रूप में तब्दील कर देते हैं।

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रेलवे के अधिकारी ने शेयर की थी तस्वीर 

रेलवे अधिकारी ने जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'यहां सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र, IIT और IIM प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र एक साथ मिलकर पढ़ते हैं।' इसके साथ उन्होंने यह भी बताया कि क्यों यहां हर रोज सैकड़ों की संख्या में छात्र हर रोज सुबह-शाम इकट्ठा होकर पढ़ाई करते हैं। उन्होंने बताया कि छात्रों के यहां आकर पढ़ाई करने का मुख्य कारण है 24 घंटे बिजली का होना। इससे छात्रों को पढ़ाई में बाधा नहीं आती है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां छात्रों के आकर पढ़ाई करने का सिलसिला साल 2002 से शुरू हुआ था। 

दरअसल, रेलवे स्टेशन पर हर वक्त बिजली रहती है। इस कारण साल 2002 में पहली बार कुछ छात्र इस स्टेशन पर आकर पढ़ाई करने लगे। इससे बाद तो यह सिलसिला चल निकला। आज 20 साल होने के बाद भी हर रोज सैकड़ों छात्र इस रेलवे स्टेशन पर आकर पढ़ाई करते हैं। आज आलम यह है कि सासाराम रेलवे स्टेशन एक कोचिंग संस्था की तरह बन गया है। जानकारी के अनुसार, यहां पढ़ने आने वाले ज्यादातर छात्र रोहतास जिले से आते हैं। वहां के गांवों में बिजली की उतनी सुविधा नहीं है।

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