Rajasthan: 24 कैरेट सोने का बना है ये साफा, 4 साल में हुआ तैयार, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

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Updated Oct 14, 2019 | 15:41 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Rajasthan News: जयपुर के एक डिजाइनर ने सोने और चांदी का साफा बना कर तैयार किया है जिसकी सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। साफा एक प्रकार का राजपूतों की पारंपरिक पगड़ी होती है।

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सोने और चांदी से बना साफा  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • राजस्थान के डिजाइनर ने बनाया 24 कैरेट सोने का साफा
  • कभी राजपूतों की शान इस साफा की कीमत 22 लाख रुपए है
  • इसकी लंबाई 9 मीटर है जिसे 4 साल में बनाकर तैयार किया गया

जयपुर : राजपूतों की शान कहे जाने वाला साफा एक बार फिर से चर्चा में है। इन दिनों राजपूतों का ये साफा इसलिए चर्चा में है क्योंकि जयपुर में शुद्ध सोने और चांदी के पतले धागों से की मदद से ये साफा तैयार किया गया है। ऐसा साफा सबसे पहले 80 साल पहले राजपूतों के द्वारा पहना गया था। 

जयपुर के एक डिजाइनर राजपूतों के इस पारंपरिक परिधान को एक बार फिर से रिक्रियेट किया है और चर्चा में आ गए हैं। भूपेंद्र सिंह शेखावत नाम के ये डिजाइनर ने इस साफा को तैयार करने में 4 साल का समय लगाया। इसके लि 24 कैरेट सोने और शुद्ध चांदी के पतले तारों को धागों की तरह तैयार किया गया है।

बता दें कि ये ये साफा जिसे टर्बन भी कहा जाता है यह राज्य में पुरुषों के द्वारा पारंपरिक परिधान के तौर पर सिर पर बांधा जाता है। शेखावत के द्वारा तैयार किया गया ये साफा करीब 22 लाख रुपए की कीमत का है जिसका वजन करीब 530 ग्राम है। वहीं इसकी लंबाई की बात की जाए तो ये 9 मीटर लंबा बताया जा रहा है। 


समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शेखावत ने बताया कि मैं लंबे समय से सोने का साफा बनाना चाहता था बस यहीं से मुझे इसे बनाने का विचार आया। इसके लिए सबसे पहले मैंने इंटरनेट पर इसके बारे में सर्च किया कि किसी और ने भी इसे बनाया है या नहीं, लेकिन मुझे एक भी नहीं मिला। इसलिए मैंने इसे अपने तरीके से बनाने का फैसला किया।

कई सौ लोगों से निराशा हाथ लगने पर आखिरकार कुछ लोगों ने मेरी मदद करने में सहमति दिखाई और बस यहीं से सोने का साफा बनाने का मेरा सपना साकार हुआ। डिजाइनर शेखावत ने बताया कि सोने का साफा सबसे पहले 70-80 सालों पहले राजपूतों के द्वारा पहना जाता था।

बाद में यह महंगा होने के कारणों से चलन से बाहर हो गया। अब भारत में कहीं भी सोने का साफा नहीं बनाया जाता है। यह राजपूतों को सिग्नेचर साफा का अपील देता है। उन्होंने आगे कहा कि करीब 48 लोगों ने इसे बनाने में मेरी मदद की।

सबसे पहले हमने सस्ते मेटल जैसे कॉपर से प्रयोग किया बाद में हमने सोने और चांदी का उपयोग किया। शेखावत ने बताया कि इसके बारे में जानकारी मिलने पर राजस्थान के एक उद्योगपति ने पहले ही ऑर्डर कर दिया है।  

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