बम धमाके में गंवाए दोनों हाथ, फिर डॉक्टरों की गलती बनी वरदान- ऐसे लिखी पीएचडी थीसिस

13 साल की उम्र में एक बम धमाके में मालविका ने अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे। डॉक्टरों ने सर्जरी के दौरान एक बड़ी गलती कर दी जो बाद में महिला के लिए वरदान साबित हुई।

Malvika Iyer
मालविका अय्यर 

नई दिल्ली: मालविका अय्यर की उम्र तब महज 13 साल थी- एक बम धमाके में उन्होंने अपने दोनों हाथ खो दिए। जाहिर है किसी की भी जिंदगी में यह झकझोर देने वाली घटना हो सकती है लेकिन मालविका के लिए जिंदगी के प्रति उनका प्यार इस हादसे से बिल्कुल भी कम नहीं हुआ। मालविका एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, अंतर्राष्ट्रीय प्रेरक वक्ता और विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता हैं। उनकी जिंदगी की उतार चढ़ाव भरी कहानी बहुत दिलचस्प है।

18 फरवरी को अपना जन्मदिन मनाने वाली मालविका ने ट्विटर पर संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण का एक अंश साझा किया। सोशल मीडिया पर नजर आने वाले उनके विचार जीवन के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएं! आज मैं आपके साथ संयुक्त राष्ट्र में दिए गए एक भाषण का एक अंश साझा करना चाहती हूं। जब बम धमाके में मैंने दोनों हाथ गंवा दिए थे, डॉक्टरों मेरे जीवन को बचाने के लिए बहुत दबाव में थे, सर्जरी के बाद मेरे दाहिने हाथ में टांके लगाने के दौरान उनसे एक गलती हो गई।'

बाहर निकली रह गई हड्डी: डॉक्टर ऑपरेशन के बाद महिला के हाथ की हड्डी को पूरी तरह से ढकना भूल गए। हड्डी ऑपरेशन के बाद बाहर निकली हुई थी। इस वजह से अगर मेरा था कहीं लग जाए तो मुझे भयानक दर्द होगा और मौत भी हो सकती है। हालांकि मालविका की सर्जरी में हुई गलती समस्या से ज्यादा एक वरदान साबित हुई। मालविका खुद कहती हैं, 'हड्डी मेरी एकमात्र उंगली की तरह काम करती है। इसकी मदद से मैं टाइप कर पाती हूं।'

लिखी पीएचडी थीसिस: उन्होंने अपनी पीएचडी थीसिस टाइप करने के दौरान और अपनी वेबसाइट बनाने के लिए इसी 'असाधारण उंगली' का इस्तेमाल किया। मालविका ने ट्वीट किया, 'मैं वास्तव में मानती हूं कि हर परेशानी में संभावना छिपी होती है और मेरा जीवन ऐसा ही एक उदाहरण रहा है। मैंने अपनी पीएचडी थीसिस लिखने का जश्न मनाया और अब मैं अपनी वेबसाइट को शेयर करने के लिए रोमांचित हूं।'

हर अनुभव एक उपलब्धि: मालविका के अनुसार हर अनुभव जीवन की उपलब्धि है। उन्होंने कहा, 'मैं उन स्थितियों में रही हूं जहां जीवन लगभग मौत की तरह था। जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो मुझे हमेशा गर्व महसूस होता है कि मैंने जीवन में सही रास्ता अपनाया। मेरे जीवन का हर अनुभव मेरे लिए विशेष है और मैं छोटी से छोटी खुशी का आनंद लेती हूं।'

मालविका की कहानी वास्तव में बहुत प्रेरणादायक और जीवन के लिए प्रेरित करने वाली है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए उनकी भावना और साहस तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।

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