क्या ऐसे होगा प्लास्टिक मुक्त भारत? दुर्गा पूजा के बाद राजधानी दिल्ली में ऐसा दिखा नजारा

puja material and plastic bags at yamuna ghat: दिल्ली में यमुना घाट पर मूर्ति विसर्जन और प्लास्टिक फेंकने पर रोक लगा रखी है, लेकिन इसके बाद भी लोग बाज नहीं आ रहे हैं। 

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पूजा के सामान को लोगों ने कालिंदी कुंज में पुल के ग्रिल में बांध दिया  

मुख्य बातें

  • दिल्ली में इस बार दुर्गा पूजा पर मूर्तियों के विसर्जन पर रोक लगी थी
  • लोगों ने कालिंदी कुंज में यमुना घाट पर पूजा के सामान को पुल के साथ ग्रिल में बांध दिया
  • इसके चलते यहां पुल की रेलिंग पर प्लास्टिक की पन्नियां ही पन्नियां दिखाई दे रही हैं

नई दिल्ली: सरकार कितनी भी कोशिश कर ले लोगों को जागरुक करने की, लेकिन लोगों की फितरत नहीं बदलेगी दिल्ली में यमुना को साफ करने की दिशा में सरकार भरपूर कोशिशें कर रही है, ताकि यमुना में प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके और इसके लिए इस बार दुर्गा पूजा पर मूर्तियों के विसर्जन पर तो रोक लगाई थी साथ ही प्लास्टिक फेंकने पर भी रोक है।

सरकार की बंदिशों के बावजूद लोग मानने को तैयार नहीं हैं और अपने मन की करने पर उतारू हैं, चाहे उसके लिए कानून तोड़ना पड़े या कुछ और भी करना पड़े। गौरतलब है कि दशहरा और दुर्गा पूजा संपन्न हो गई है और इतने बैन और बंदिशों के बाद भी कालिंदी कुंज के यमुना घाट पर नजारा देखकर आप हैरान रह जायेंगे यहां मूर्ति विसर्जन पर रोक थी इसलिए यहां मूर्ति विसर्जन तो नहीं हुआ।

लेकिन फिर भी नहीं माने और लोगों ने पूजा का सामान तो नदी में नहीं प्रवाहित किया लेकिन इसका रास्ता ये निकाला कि इस पूजा के सामान को पुल के साथ ग्रिल में बांध दिया इसके चलते यहां पुल की रेलिंग पर प्लास्टिक की पन्नियां ही पन्नियां दिखाई दे रही हैं और ये पुल के रास्ते में भी बिखरी दिखाई दे रही हैं। 

 

 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्‍टूबर को राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती से 'सिंगल यूज प्लास्टिक' का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने की बात कही है। सरकार का मकसद इसे 2022 तक पूरी तरह समाप्‍त करने का है।

सिंगल यूज प्लास्टिक का अर्थ है, एक ही बार इस्तेमाल होने लायक प्लास्टिक। प्लास्टिक की थैलियां, प्लेट, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ, पाउच आदि इसके कुछ उदाहरण हैं, जिनका केवल एक बार ही इस्‍तेमाल होता है, दूसरी बार नहीं।

एक बार इस्‍तेमाल के बाद इन्‍हें फेंक दिया जाता है। यूं तो इंसानों के लिए इसका इस्‍तेमाल बेहद सहज होता है और इसके उत्‍पादन पर खर्च भी कम ही आता है, पर इसके अंदर जो रसायन होते हैं, वे इंसानों के स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करने के साथ-साथ पर्यावरण को भी प्रदूषित करते हैं।

यहां-वहां फेंके गए प्लास्टिक के कचरे से निकलने वाला केमिकल बारिश के पानी के साथ जलाशयों में जाता है, जो बेहद खतरनाक होता है। प्‍लास्टिक का इस्‍तेमाल पूरी दुनिया में किस तरह धड़ल्‍ले से होता है, उसका अंदाजा भी इसी से लगाया जा सकता है कि एक आकलन के मुताबिक, दुनियाभर में लोग हर एक मिनट पर प्‍लास्टिक की 10 लाख बोतलें खरीदते हैं। इसकी रिसाइक्लिंग भी एक बड़ी समस्‍या है और करीब 91 फीसदी इस्‍तेमाल हो चुके प्‍लास्टिक को रिसाइकल नहीं किया जा सकता। 

 

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