क्या अखबार छूने से फैलता है कोरोना वायरस? जानें ये हकीकत है या अफवाह

Coronavirus transmission: कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि अखबार छूने से संक्रमण फैल रहा है।

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सांकेतिक फोटो (तस्वीर साभार- unsplash) 

मुख्य बातें

  • कोरोना के कारण लोग चीजों को छूने में सतर्कता बरत रहे हैं
  • कई लोग अखबार को भी छूने में घबरा रहे हैं
  • क्या आपके मन भी अखबार से संक्रमण फैलने का भय है?

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण लोग दहशत में हैं। सोशल मीडिया पर लोग दावे कर रहे हैं कि क्या छूना सही है और क्‍या गलत है? इस खतरनाक वायरस के चलते हर छोटी-बड़ी चीजों को लेकर सावधानी बरती जा रही है। ऐसे में रोजाना पढ़े जाने वाले अखबार को लेकर भी तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। लोगों के मन में ऐसा ही एक सवाल है कि क्या अखबार से कोरोना का वायरस फैल सकता है? दरअसल, अब तक ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं है और सोशल मीडिया पर अखबार को लेकर की जा रही सारी बातें सरासर भ्रम फैलाने वाली हैं। 

'पेपर पर वायरस लंबे समय तक जिंदा नहीं रहते'

इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार, यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन का कहना है कि जीवित कोशिकाओं के बाहर ज्‍यादातर सतहों पर कोरोना वायरस बहुत समय तक जिंदा नहीं रहता है। वायरोलॉजिस्‍ट का कहना है कि जब आप अखबार छूते हैं तो संक्रमण फैलने की आशंका तकरीबन न के बराबर होती है। एम्‍स के डायरेक्‍टर डॉक्‍टर रणदीप गुलेरिया के अनुसार, संक्रमित करने के लिए पेपर पर वायरस इतने लंबे समय तक जिंदा नहीं रहते हैं। न ही इनका वितरण कोविड-19 के मरीज करते हैं. लिहाजा, इस तरह का कोई जोखिम नहीं है।

डब्ल्यूएचओ का क्या कहना है? 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का मानना है कि दूध की थैली, और अखबार पर वायरस हो सकता है लेकिन इनसे कोरोना का फैलना तथ्यात्मक रूप से बिल्कुल गलत है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इस बात की संभावना कम ही है कि एक संक्रमित व्यक्ति का छुआ हुआ पैकेट भी संक्रमणग्रस्त हो जाएगा। यह जोखिम भी बहुत कम है कि उससे किसी और को कोरोना संक्रमण हो जाएगा क्योंकि यह पैकेट कई माध्यमों, कई तापमान से गुजरते हुए आपके घर तक पहुंचता है।

वहीं, इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन (आईएनएमए) ने स्वास्थ्य एजेंसियों और चिकित्सा विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कहा कि प्रिंट अखबार, पत्रिका, पत्र या पैकेज के माध्यम से प्रेषित होने वाले कोरोना वायरस के लिए कोई रिकॉर्ड या कोई सबूत नहीं। आईएनएमए ने कहा कि सभी वैज्ञानिक प्रमाणों से पता चलता है कि अखबारी कागज कोरोना से सुरक्षित है।  आईएनएमए ने कहा कि समाचार पत्र स्याही और छपाई जैसी कई प्रकियाओं से गुजरते हैं लेकिन कभी कोरोनो संक्रित होने की सूचना नहीं मिली। 

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