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हिमाचल का छिपा खजाना, 'मिनी थाईलैंड' से 'सेरोलसर झील' तक, मेरी जीभी एडवेंचर स्टोरी

Weekend Trip From Delhi: भीड़भाड़ से दूर सुकून, प्रकृति और रोमांच को एकसाथ महसूस करने के लिए मैंने जीभी की यात्रा की। पहाड़ों तक का सफर, ब्यास नदी किनारे बिताए पल, लकड़ी के कॉटेज में ठहराव और मिनी थाईलैंड जैसे छिपे प्राकृतिक नजारों ने मेरी इस ट्रिप को खास बनाया। यह सफर सिर्फ घूमना नहीं था बल्कि खुद से जुड़ने का अनुभव भी था।

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जीभी की जादुई यात्रा

Jibhi Himachal Pradesh: इस बार दिल ने कहा भीड़ से दूर, शांति वाली जगह चलते हैं और बस, बैग उठाया और निकल पड़ा जीभी की तरफ। ये छोटा सा हिल स्टेशन है, लेकिन सुकून में बड़ा भारी है। मैं दिल्ली के ISBT कश्मीरी गेट से मनाली वाली बस में बैठा। बस ने मुझे मनाली से पहले ऑट टनल पर उतार दिया। यहां से जीभी करीब 30 किलोमीटर है।

टनल के पास ही ब्यास नदी बह रही थी, तो मैंने सोचा थोड़ा यहां टाइम बिताया जाए। और सच बताऊं नदी किनारे बैठकर चाय-पकौड़े खाना, ठंडी हवा, बहते पानी की आवाज ये टाइम जरा भी बेकार नहीं गया। थोड़ी देर बाद वहीं से जीभी के लिए टैक्सी मिल गई। शेयरिंग टैक्सी में करीब 2 घंटे के पहाड़ी सफर के बाद मैं जीभी पहुंच गया। कोई होटल पहले से बुक नहीं था, तो अब असली टास्क शुरू-रुकेंगे कहां? किस्मत अच्छी थी, शेयरिंग कैब में मिले 3 ट्रैवलर भी रूम ढूंढ रहे थे। हमने सोचा साथ ही देखते हैं।

जहां कैब ने छोड़ा, वहां से करीब 40-50 सीढ़ियां नीचे उतरकर हमारा स्टे था Woodland Chalet। लकड़ी का बना कॉटेज, सामने पहाड़, देवदार के जंगल। व्यू ऐसा कि बस खड़े-खड़े देखते रहो। थोड़ी देर आराम किया और फिर निकल पड़ा कुल्ही कतांदी, जिसे लोग मिनी थाईलैंड भी कहते हैं।

जीभी हिमाचल प्रदेश

जीभी हिमाचल प्रदेश

मिनी थाईलैंड चट्टानों के बीच छिपी जादुई जगह

घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित यह स्थान किसी फिल्मी सीन की याद दिलाता है। दो विशाल चट्टानें एक-दूसरे से इस तरह सटी हुई हैं कि उनके बीच से नदी की एक पतली धारा बहती है। यह दृश्य थाईलैंड के कुछ प्रसिद्ध समुद्री तटों और लैगून जैसा नजर आता है इसी वजह से इसे मिनी थाईलैंड कहा जाता है। क्रिस्टल जैसा साफ पानी, हरे-भरे जंगल और फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन नजारे इस जगह की खासियत है।

यहां जाने के लिए कोई भारी शुल्क नहीं है। पर्यटकों से रास्तों के रखरखाव के लिए सिर्फ ₹20 जैसा मामूली शुल्क लिया जाता है। कुछ टाइम यहां बिताने के बाद और फोटो क्लिक करवाने के बाद मैं निकल पड़ा जीभी वॉटरफॉल की ओर जहां पहुंचने के लिए घने जंगलों के बीच एक छोटी और आसान पैदल यात्रा करनी होती है।

चट्टानों के बीच छिपी जादुई जगह

चट्टानों के बीच छिपी जादुई जगह

जीभी वॉटरफॉल जंगल के बीच 50 फीट ऊंचा सुकून

करीब 200 मीटर चलकर मैं झरने के नीचे पहुंच गया। लगभग 50 फीट ऊंचा झरना, चारों तरफ हरियाली, ठंडी फुहार पूरा माहौल फ्रेश कर देने वाला। वहां कुछ और लोग भी फोटो खींच रहे थे, तो मैंने भी अलग-अलग एंगल से खूब तस्वीरें लीं। चारों तरफ हरियाली ही हरियाली थी बिल्कुल ताजा, सुकून देने वाला माहौल। थोड़ी देर वहां टाइम बिताने के बाद मैं वापस होमस्टे पर पहुंचा जहां रात में साथियों के साथ बोनफायर, म्यूजिक और पहाड़ों की ठंडी हवा का मजा लिया सच कहूं तो ट्रिप का ये गोल्डन मोमेंट था।

जीभी वॉटरफॉल

जीभी वॉटरफॉल

जालोरी पास रोड ट्रिप: संकरी सड़कें और एडवेंचर ड्राइव

अगली सुबह प्लान बना जालोरी पास का। जीभी से करीब 20 किलोमीटर दूर, ऊंचाई लगभग 10,814 फीट। रास्ता संकरा, कुछ जगह कीचड़ और फिसलन है जो आपको मुसीबत में डाल सकती है। जालोरी पास के आसपास कई शानदार जगहें हैं जैसे- सेरोलसर झील (5 किमी आसान ट्रेक), रघुपुर किला, 360° व्यू पॉइंट जहां से हिमालय की चोटियां दिखती हैं, और दर्रे पर बना काली माता मंदिर। इन जगहों पर जाकर जो सुकून मिला, वो शहर में मिलना मुश्किल है।

जालोरी पास रोड ट्रिप

जालोरी पास रोड ट्रिप

शाम को बस पकड़ी और वापस दिल्ली के लिए निकल पड़ा। ट्रिप छोटी थी, लेकिन दिमाग और दिल दोनों रीफ्रेश होकर लौटे। जीभी सच में वो जगह है जहां आप घूमने नहीं, खुद को महसूस करने जाते हो।

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