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Explained: हवा हुई जहरीली! क्या एयर प्यूरीफायर बचा सकता है आपको? समझिए पूरी बात

Air Quality Index (AQI): 0 से 50 को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 को औसत, 201 से 300 को खराब, 301 से 400 को बहुत खराब और 401 से 500 एक्यूआई को बहुत ही गंभीर माना जाता है। अब यहां एक सवाल सामने आता है कि इस जहरीली हवा से बचा कैसे जाए? हवा प्रदूषण से बचने के लिए सबसे पहले एयर प्यूरीफायर (Air Purifier) का नाम सामने आता है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या एयर प्यूरीफायर वास्तव में कारगर होता है?

can an air purifier save you

can an air purifier save you/Photo-TimesNowHindi

दिल्ली का हवा जहरीली हो गई है और यह हम नहीं, खुद ही दिल्ली की हवा बता रही है कि सांस लेना कठिन हो गया है। लोगों के गला जाम हो गया, दम घूंट रहा है और जिन्हें अस्थमा है उनकी परेशानी तो पूछने लायक ही नहीं है। पिछले एक महीने में दिल्ली की हवा दुनिया की सबसे खराब हवा में शामिल हुई है यानी देश की राजधानी नई दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में पहले नंबर पर है। दिल्ली में हवा की एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई 400 के पार है जो कि बहुत ही गंभीर श्रेणी में है।

0 से 50 को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 को औसत, 201 से 300 को खराब, 301 से 400 को बहुत खराब और 401 से 500 एक्यूआई को बहुत ही गंभीर माना जाता है। अब यहां एक सवाल सामने आता है कि इस जहरीली हवा से बचा कैसे जाए? हवा प्रदूषण से बचने के लिए सबसे पहले एयर प्यूरीफायर (Air Purifier) का नाम सामने आता है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या एयर प्यूरीफायर वास्तव में कारगर होता है, क्या वास्तव में यह प्रदूषण से बचाता है या फिर यह एक हौवा है जिसके पीछे लोग आंख मूंदकर भाग रहे हैं। आइए विस्तार से जानते है...

AQI रेंजश्रेणीरंग कोडअर्थस्वास्थ्य पर प्रभाव
0 – 50अच्छी (Good)🟢 हराहवा स्वच्छ और ताजा हैसामान्य लोगों के लिए कोई खतरा नहीं
51 – 100संतोषजनक (Satisfactory)🟡 पीलाहवा थोड़ी प्रदूषित हैसंवेदनशील लोगों को हल्की परेशानी हो सकती है (जैसे एलर्जी या अस्थमा)
101 – 200मध्यम रूप से प्रदूषित (Moderate)🟠 नारंगीहवा में कुछ हानिकारक कण मौजूदलंबे समय तक संपर्क से सांस लेने में दिक्कत, बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी
201 – 300खराब (Poor)🔴 लालहवा बहुत प्रदूषितफेफड़ों पर असर, खांसी-जुकाम और सांस की दिक्कतें बढ़ सकती हैं
301 – 400बहुत खराब (Very Poor)🟣 बैंगनीहवा बेहद हानिकारकअस्थमा, हृदय और श्वसन रोग वाले लोगों के लिए खतरनाक
401 – 500गंभीर (Severe / Hazardous)⚫ गहरा भूरा या कालाहवा अत्यंत विषैलीसभी के लिए स्वास्थ्य जोखिम; लंबे समय तक रहना हानिकारक, बाहर निकलने से बचें

एयर प्यूरीफायर क्या होता है?

सबसे पहले समझते हैं कि एयर प्यूरीफायर क्या होता है तो आपको बता दें कि एयर प्यूरीफायर एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक मशीन होती है जो कमरे या घर के अंदर की हवा को फिल्टर करके साफ करती है। इसका मुख्य काम हवा से धूल, धुआं, परागकण, बैक्टीरिया, वायरस और हानिकारक गैसें हटाना होता है।

एयर प्यूरीफायर कैसे काम करता है?

एयर प्यूरीफायर में आमतौर पर कई फिल्ट्रेशन लेयर्स होती हैं यानी एक एयर प्यूरीफायर में कई सारे फिल्टर्स होते हैं जो कि हवा को साफ करते हैं। ये फिल्टर्स कई तरह के होते हैं जिनमें प्री-फिल्टर, हेपा फिल्टर, एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर, यूवी लाइट फिल्टर, आयोनाइजर फिल्टर आदि शामिल होते हैं। यह मुख्य रूप से इनडोर एयर क्वालिटीसुधारने के लिए उपयोग किया जाता है यानी आपके घर या ऑफिस या किसी कमरे की हवा को सांस लेने योग्य बनाना।

air purifier

एयर प्यूरीफायर के फिल्टर्स

  • Pre-filter: यह बड़े कणों जैसे बाल, धूल, और परागकण को रोकता है।
  • HEPA Filter: यह सबसे अहम हिस्सा होता है। यह हवा से 0.3 माइक्रोन तक के 99.97% कणों को फिल्टर कर सकता है यानी यह PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों को काफी हद तक हटा देता है।
  • Activated Carbon Filter: यह गैसें, गंध, और वाष्पशील रसायन (VOC) को सोख लेता है। जैसे सिगरेट का धुआं, पेट्रोल की गंध, किचन से निकलने वाली गैसें आदि।
  • UV light या Ionizer: कुछ मॉडल्स में यह भी होता है, जो बैक्टीरिया या वायरस को मारने में मदद करते हैं।

air purifier filters

क्या एयर प्यूरीफायर दिल्ली जैसे शहरों में कारगर है?

इस सवाल का जवाब हां में है। दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में एयर प्यूरीफायर कारगर तो है लेकिन सीमित हद तक। दिल्ली जैसी जगहों में जहां बाहर का AQI अक्सर 400–900 तक पहुंच जाता है, वहां एयर प्यूरीफायर कम से कम घर के अंदर की हवा को बेहतर बना सकता है।

एयर प्यूरीफायर के प्रकारकाम करने का तरीकाइस्तेमाल की जगह
HEPA Filter Basedठोस कणों को हटाता हैघरों, ऑफिसों के लिए
Activated Carbon Filterगैसें और गंध हटाता हैरसोई या धुएँ वाले क्षेत्रों में
UV Purifierजीवाणु, वायरस मारता हैअस्पताल, क्लिनिक
Ionizer Purifierआयन बनाकर धूल नीचे गिराता हैछोटे कमरे, व्यक्तिगत उपयोग
Ozone Purifierओजोन से कीटाणु मारता है (सावधानी आवश्यक)प्रयोगशालाओं में सीमित उपयोग

क्या एयर प्यूरीफायर के फायदे

घर के अंदर PM2.5 और PM10 स्तर को 60–90% तक घटा सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा या एलर्जी वाले लोगों को राहत मिलती है। नींद और फेफड़ों के स्वास्थ्य में सुधार होता है,लेकिन सीमाएं भी हैं जैसे बाहर का प्रदूषण बहुत ज्यादा होने पर 100% सफाई संभव नहीं। कमरे के दरवाजें-खिड़कियां बंद रखना पड़ता है। फिल्टर को नियमित रूप से बदलना जरूरी है (हर 6–12 महीने में), हालांकि यह काफी महंगा पड़ता है क्योंकि फिल्टर की कीमत करीब 3000 हजार रुपये के करीब होती है। बिजली की खपत और मशीन की कीमत भी ध्यान में रखनी होती है।

air pollution in delhi

सही एयर प्यूरीफायर कैसे चुनें?

1. कमरे का आकार और कवरिंग एरिया- जब आप एयर प्यूरीफायर ले रहे हों तो सबसे पहले यह देखें कि आप किस कमरे में उसे इस्तेमाल करेंगे। कमरे की लंबाई, चौड़ाई और यदि छत ऊंची हो तो उसकी ऊंचाई भी मायने रखती है। आमतौर पर निर्माता “कवरिंग एरिया” यानी कितने वर्ग-फुट (sq ft) या वर्ग-मीटर (m²) तक की जगह के लिए मॉडल उपयुक्त है, यह बताते हैं। उदाहरण के लिए यदि आपका कमरा 150 sq ft है, तो मॉडल का स्मोक-CADR लगभग 100 cfm (cubic feet per minute) या उसके आसपास होना चाहिए। यदि आप बहुत बड़े हॉल, लिविंग रूम या खुले प्लान में प्रयोग करना चाहते हैं, तो बेहतर है कि क्षमता थोड़ी ऊँची ले लें ताकि हवा पूरी तरह से जल्दी साफ हो सके।

2. CADR, ACH और साफ-हवा देने की क्षमता- “CADR” यानी Clean Air Delivery Rate यह बताता है कि एक एयर प्यूरीफायर कितनी तेजी से हवा को स्वच्छ बना सकता है। जितना CADR अधिक होगा उतनी ही जल्दी और अधिक हवा साफ होगी इसके अतिरिक्त “ACH” (Air Changes per Hour) भी महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि एक घंटे में कितनी बार पूरे कमरे की हवा बदलाव होकर प्यूरीफाइड हवा से बदलती है। यदि घर में प्रदूषण ज्यादा है या कोई एलर्जी/अस्थमा वाला है, तो 4-6 बार या उससे अधिक ACH बेहतर माना जाता है। इसलिए सिर्फ मॉडल के नाम या “खूब बड़े कवरेज एरिया” पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं। CADR और ACH देखकर यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मॉडल वास्तविक रूप से आपके कमरे में काम करेगा।

3. फिल्टर की क्षमता और प्रकार- एयर प्यूरीफायर का असली काम फिल्टरिंग है, इसलिए फिल्टर के प्रकार और उसकी क्षमता बहुत मायने रखती है। सबसे मुख्य है “True HEPA” फिल्टर है। यह तकरीबन 0.3 माइक्रोन आकार के कणों को 99.97% तक हटा सकता है। साथ ही यदि आपके घर में धुआं, गंध, गैस वाष्प जैसे प्रदूषक हैं, तो “एक्टिवेटेड” होना बहुत लाभदायक है। यह गैसों व गंधों को सोखने में सक्षम है। फिल्टर की सफाई व बदलने की आवश्यकता को भी समझना चाहिए। उदाहरण के लिए, HEPA फिल्टर को लगभग 6-12 महीने बाद बदलना पड़ सकता है, कार्बन फिल्टर häufiger बदलने की जरूरत हो सकती है।

4. शोर स्तर, ऊर्जा खपत व मेंटेनेंस लागत- चूंकि एयर प्यूरीफायर कई घंटों तक चलता रहता है, इसलिए उसके चलते होने पर उत्पन्न शोर व बिजली की खपत पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। यदि इसे बेडरूम में रखना है तो 50 dB से कम शोर वाला मॉडल बेहतर रहेगा। ऊर्जा-खपत कम हो तो बिजली का बिल कम आएगा इसलिए ऊर्जा बचत के मानक (जैसे Energy Star) देखें।

5. एक्सट्रा फीचर्स, ब्रांड भरोसा व भरोसेमंद सेवा- आजकल एयर प्यूरीफायर में कई “स्मार्ट” फीचर्स आ रहे हैं। जैसे एयर क्वालिटी इंडिकेटर, ऑटो मोड, ऐप कंट्रोल, वाई-फाई कनेक्टिविटी इत्यादि। ये सुविधाएं उपयोग में बढ़िया हैं लेकिन यदि आपका बजट सीमित है तो सिर्फ उन फीचर्स पर ध्यान न दें बल्कि मूल कार्य-क्षमता (फिल्टर + CADR + कमरे की उपयुक्तता) पहले देखें। ब्रांड के भरोसे, सर्विस नेटवर्क, सर्टिफिकेशन जैसे AHAM, ENERGY STAR, CARB आदि को भी चेक करें।

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Pradeep Pandey
Pradeep Pandey Author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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