आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आसान हो जाएगी रोजमर्रा की जिंदगी? जानिए आप पर क्या होगा असर

टेक एंड गैजेट्स
Updated Jul 29, 2019 | 09:48 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम आपने कई बार सुना होगा, लेकिन ये क्या क्या काम कर सकता है इसके बारे में आपको जानकारी है। आइए जानते हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है और इससे क्या होगा फायदा  |  तस्वीर साभार: BCCL

आम नागरिकों के लिए सुविधाओं के निर्माण में जानकारी नहीं बल्कि जानकारी से प्राप्त की जाने वाली बुद्धि महत्वपूर्ण होती है। हम सूचना युग से बुद्धिमत्ता युग की ओर बढ़ रहे हैं। आज के इस दौर में भारत के पास सूचना प्रौद्योगिकी में विशाल प्रतिभा, विरासती संपत्ति के रूप में स्वतंत्रता, डेटा खपत एवं विकास का उच्चतम दर और सभी क्षेत्रों में तेजी से हो रहा डिजिटलीकरण यह सभी ताकतें हैं। वर्तमान अर्थव्यवस्था से आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था तक बढ़ने के लिए हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स की तकनीक को अभिनव विकास के लिए इस्तेमाल करने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। 

स्वचालित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स) प्रक्रियाओं को सभी विभिन्न क्षेत्रों में लागू करने वाली कुछ वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के नाते, भारत एआई उपयोग के रुझानों में यक़ीनन आगे है। सेल्सफोर्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, एशिया पैसिफिक क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स में तत्परता के मामले में सिंगापूर और हॉन्गकॉन्ग के बाद तीसरे स्थान पर भारत है। इस स्थिति में हमें एआई का उपयोग करते हुए सुविधाओं के विकास में नैतिक प्रथाओं से जुड़े पहलुओं का भी ध्यान रखना होगा।

एआई का एक आसान उदाहरण
मान लीजिए; बाहर गर्मी है; दिन भर के काम के बाद आप घर लौट रहे है और थोड़ा आराम करना चाहते है। आप अपने घर से दो किलोमीटर की दूरी पर है और अपने स्मार्ट फोन ऐप के जरिए घर के एसी का तापमान, रोशनी, पर्दें आदि अपनी पसंद के अनुसार सेट करते है। यह इंटरकनेक्टेड दुनिया है, जो इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (आईओटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) जैसी तकनीकों के कारण संभव हो रही है।

इस उदहारण में उन संभावनाओं का केवल ऊपरी हिस्सा बताया गया है जो एआई से मिल सकती हैं। भविष्य में ऐसी दुनिया होगी जहां मशीनें न केवल उन्हें दिए गए काम करेंगी बल्कि उनके प्रोग्राम में फीड की गई जानकारी और अंतर्दृष्टि के जरिए निर्णय ले सकेंगी और उसके अनुसार काम करेंगी। एआई द्वारा संचालित मशीनें काम करने के साथ-साथ चीजों को समझने और उनके विश्लेषण की क्षमता भी रखती हैं।

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क्या इंसान की जगह मशीनें ले लेंगी?

प्रौद्योगिकी जगत में इन व्यापक क्षमताओं के आधार पर एआई के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण बनाए गए हैं। कुछ विचारप्रणालिओं के अनुसार एआई की वजह से मनुष्य की जगह पूरी तरह से मशीनें ले लेगी। परन्तु कुछ सिद्धांतों का मानना है कि, एआई एक क्रांतिकारी तकनीक है, इसका उपयोग अगर सतर्कता से और उचित रूप से किया जाता है तो इसमें मनुष्य की जीवनशैली में क्रांति लाने की क्षमता है। वास्तव में एआई अभी भी पूरी तरह से विकसित नहीं है और इससे कितने और किस प्रकार के अवसर मिल सकते हैं यह अभी भी अस्पष्ट है।

अनुमान लगाया गया है कि, अंततः एआई व्यक्ति और समाज के कल्याण को बढ़ाते हुए गुणात्मक प्रगति और नवाचार लाएगा। उदहारण के तौर पर, यूएन के चिरस्थाई विकास लक्ष्यों की पूर्ति में एआई सिस्टम्स लक्षणीय योगदान दे सकती हैं, जलवायु परिवर्तन की चुनौतिओं से निपटना, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को तर्कसंगत बनाना, स्वास्थ्य, गतिशीलता और विनिर्माण प्रक्रियाओं में सुधार लाना, निरंतरता और सामाजिक सामंजस्य संकेतकों में हमारे विकास का समर्थन आदि में एआई का उपयोग हो सकता है। इसके लिए हमें मानव-केंद्रित एआई सिस्टम्स बनानी होगी जिनकी रचना मानव कल्याण के लिए की गई होगी।

एआई से खतरे भी हैं

एआई से नए अवसर मिलने की आशंका कितनी भी प्रबल हो, इसमें कुछ खतरे भी हैं जिन्हें सही और प्रभावी तरीके से दूर करना होगा। एआई को बेहतर दृष्टिकोण देने के लिए एआई सिस्टम्स जिनमें काम करती हैं वह वातावरण और सामाजिक-तकनीकी वातावरण अधिक विश्वसनीय होना जरुरी है। इससे न केवल एआई सिस्टम्स के फायदें बढ़ेंगे बल्कि उससे जुड़े खतरें भी कम होंगे।

एआई सिस्टम्स की विश्वसनीयता उनके जीवनचक्र के तीन प्रमुख घटकों पर निर्भर होती है - विधिसंगतता, देश के कानून और नियमों का पालन और मजबूती, एआई सिस्टम्स को तकनीकी और सामाजिक दृष्टी से भी मजबूत होना चाहिए क्योंकि अच्छे इरादों से बनाई गई एआई सिस्टम्स भी अनजाने में नुकसान पहुंचा सकती हैं।

यह तीन घटक आवश्यक जरूर हैं लेकिन इच्छित परिणाम पाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। आदर्श रूप से देखा जाए तो इन तीनों का काम एक साथ मिलकर होता है और संचालन के दौरान एक दूसरे को व्याप्त करते हैं। परन्तु वास्तव में इन घटकों के बीच तनाव हो सकता है (उदहारण के तौर पर, कभी कभी वर्तमान कानून का दायरा और विषय नैतिक मानदंडों के साथ कदम मिलाकर चलने में असमर्थ हो सकता है) व्यक्तिगत और सामाजिक रूप से हमारी जिम्मेदारी है कि एआई की विश्वसनीयता को बरक़रार रखने के लिए इन तीनों घटकों को सुनिश्चित किया जाए।

अब सवाल यह उठता है कि ये तीन घटक इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? इसे समझने के लिए एक उदहारण लेते हैं - एक महिला को सेल्फ ड्राइविंग कार की टक्कर लगती है और इस हादसे में महिला की मृत्यु होती है। कार में ड्राइवर था लेकिन पूरा नियंत्रण एआई में था। अब इस मामले में दोषी कौन है? ड्राइवर सीट पर बैठा हुआ आदमी? एआई सिस्टम्स के डिज़ाइनर्स? या ऑन-बोर्ड सेन्सरी इक्विपमेंट के निर्माता? एआई से मशीनें स्पष्ट रूप से प्रोग्राम किए बिना जानकारी के आधार पर सीखती हैं और निर्णय लेती हैं।

इस तरह की काल्पनिक स्थितियों को देखा जाए तो, एआई सिस्टम में निष्पक्षता का होना महत्वपूर्ण है। इसके लिए पहले यह समझना होगा कि, पूर्वाग्रह कैसे लाए जा सकते हैं और सुझावों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, विभिन्न एआई प्रतिभाओं को आकर्षित कर, पूर्वाग्रहों को ढूंढ कर उन्हें नष्ट करने के लिए विश्लेषणात्मक तकनीकों का विकास कर, मानवी समीक्षा और कार्यक्षेत्र अनुभव को सुविधाजनक बनाना होगा।

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निष्पक्षता के साथ-साथ एआई सिस्टम की विश्वसनीयता और सुरक्षा यह दो पहलू महत्वपूर्ण हैं। इसमें प्रशिक्षण जानकारी और परीक्षाओं का मूल्यांकन, वर्तमान में चल रहे काम की निगरानी, असंभावित परिस्थितिओं के लिए डिज़ाइनिंग - जिसमें नापाक हमले भी शामिल हैं और मनुष्यों को जानकारी देते रहना आदि शामिल हैं।

साथ ही, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, एआई सिस्टम को समय-समय पर बनाए जाने वाले गोपनीयता कानूनों का पालन करना चाहिए, जानकारी प्राप्त करने और उसके उपयोग के बारे में पारदर्शिता रखनी चाहिए, और अच्छे नियंत्रण रखने चाहिए ताकि लोग बुरे प्रभावों से बचने के लिए अपने डेटा, डिज़ाइन सिस्टम को सावधानी से चुन सकें और गोपनीयता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए डी-आइडेंटिफिकेशन तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।

समावेश यह और एक पहलू है। इसमें समावेशी डिज़ाइन प्रथाओं का होना आवश्यक है, जो संभावित बाधाओं में लोगों को बचा सकता है, विकलांगों के लिए अवसर बढ़ा सकता है, प्रासंगिक बातचीत के जरिए विश्वास बढ़ा सकता है और आईक्यू के साथ-साथ ईक्यू भी ला सकता है। साथ ही सिस्टम्स का पारदर्शी होना जरुरी है, लोगों को यह समझना चाहिए कि निर्णय कैसे लिए गए, प्रासंगिक स्पष्टीकरण दिए जाने चाहिए और संभावित पूर्वाग्रहों, गलतिओं और अनपेक्षित परिणामों के बारे में जागरूकता को बढ़ाना चाहिए।

इसलिए, जैसा कि हम देख सकते हैं, भारत में एआई कार्यान्वयन में नैतिक विचारों की प्रासंगिकता और परिणामों को समझने के लिए अग्रणी उद्यमियों, वैश्विक शैक्षिक अनुसंधानकर्ताओं और नीति निर्धारकों को एक साथ लाना जरुरी है। इन सभी बातों को मद्देनज़र रखते हुए, 'नेचर' में प्रकाशित एक शोध पत्र में अलग-अलग देशों और संस्थानों के 23 लेखकों के समूह ने यह स्पष्ट किया है कि, मशीनों के व्यवहार और एआई सिस्टम्स के अभ्यास के लिए अलग-अलग ज्ञान शाखाओं द्वारा प्रयास किए जाने चाहिए जिनमें सामाजिक वैज्ञानिक, कंप्यूटर सायन्टिस्टस, अर्थशास्त्री, मनोवैज्ञानिक और वकील शामिल हो सकते हैं।

एआई के तटस्थ और बहुविषयक अध्ययन में अन्य विज्ञानों से सिद्धांतों को लेकर स्वायत्त प्रणालियों के लिए दिशानिर्देशों और मानकों के निर्माण की क्षमता होती है। एआई में बड़े पैमाने पर बहुविषयक अध्ययन की रचना और विकास में अनुसन्धान संस्थान और सरकारी फंडिंग एजंसियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं विचारों के आधार पर भारत के नीति आयोग ने हाल ही में एआई के लिए एक नीति का ड्राफ्ट बनाया है जिसमें नेशनल एआई मार्किट (एनएआईएम) के निर्माण का सुझाव दिया गया है।

एआई आज की सबसे नई तकनीकों में से एक है और यह आगे बढ़ते ही जाएगी। जानकारी, मशीनों का सीखना आदि से लाभ उठाते हुए उद्यमों को हर एक संवाद को अवसर में बदलने का फायदा मिल सकता है। एआई से न केवल मार्जिन को बढ़ाया जा सकता है बल्कि जहाँ ज्यादा से ज्यादा पहुँच और वचनबद्धता आवश्यक है उन मामलों में खर्च और बुद्धि को निर्देशित करते हुए निवेश पर अधिकतम लाभ कमाए जा सकते हैं। लेकिन यह सब कुछ करते हुए उच्चतम नैतिक मानकों का पालन करना आवश्यक है।

(राजन एस मैथ्यू, डायरेक्टर जनरल, सीओएआई)

(ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)

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