Koo App: आत्मनिर्भर ऐप इनोवेशन चैलेंज में 'कू ऐप' का जलवा, झोली में खिताब

Koo App: सह-संस्थापक- सीईओ अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा, “हम आत्मनिर्भर ऐप चैलेंज के विजेताओं में से एक होने के बारे में बहुत उत्साहित हैं। पीएम मोदी स्टार्टअप, इनोवेटर्स को अपनी रचना दिखाने के लिए मौका दे रहे हैं।

Koo App: आत्मनिर्भर ऐप इनोवेशन चैलेंज में 'कू ऐप' का जलवा, झोली में खिताब
ट्विटर को टक्कर देने की तैयारी में कू ऐप 

मुख्य बातें

  • आत्मनिर्भर ऐप इनोवेशन चैलेंज में 'कू ऐप' का जलवा, झोली में खिताब
  • Koo को मार्च 2020 में लॉन्च किया गया था और अब यह 4 भारतीय भाषाओं - हिंदी, कन्नड़, तमिल और तेलुगु में उपलब्ध है
  • Koo को अप्रमेय राधाकृष्ण और मयंक बिडवतका द्वारा सह-स्थापित किया गया है

नई  दिल्ली: ट्विटर (Twitter) को  टक्कर देने वाला भारत का ट्विटर  कू (Koo) ऐप ने जीता पीएम मोदी की आत्मनिर्भर ऐप चैलेंज का खिताब जीत लिया है। Koo ( कू) ऐप  को सोशल मीडिया केटेगरी में चुना गया है |  ट्विटर (Twitter) को टक्कर देने के लिए भारत ने पना पहला माक्रोब्लॉग्गिंग प्लेटफार्म  Koo (कू ) ऐप बनाया  था जहां भारतीय अपने आईडिया, राय,विचार और खबरें लोगो से शेयर कर सकते है और लोगो को भी जोड़ सकेंगे.  एक ऐसा माध्यम है जो भारत के उन्ह सभी छोटे- छोटे शहरों और कस्बों के लोगो को जो रहा है जहाँ भारत के लोग अंग्रेजी नहीं जानते पर अपने इर्दगिर्द  हो रही ख़ास खबरें/ हलचल और मुद्दों को बारें में बात करना चाहते है जिससे की भारत की नेताओं का ध्यान उन सभी मुद्दों पर आकर्षित किया जा सके और जनता का उत्थान हो  |

मातृभाषा में लोगों को जोड़ेगा कू ऐप
कू (Koo) के क और हम इस अवसर के लिए आभारी हैं। उन सभी के लिए जो अपनी मातृभाषा में लोगों से जुड़ना चाहते हैं, हम Koo को व्यापक भारत में ले जाने के लिए तत्पर हैं। कू के सह-संस्थापक मयंक बिडवतका ने कहा, “आत्मनिर्भर ऐप चैलेंज में भाग लेने वाली 6940 प्रविष्टियों में से एक श्रेणी की विजेता सूची का हिस्सा बनाकर हमें सम्मानित किया गया है। हमारी सरकार एक बेहतर भारत के लिए प्रौद्योगिकी नवाचार पर जोर दे रही है। हमारी रचना के लिए पहचाने जाने पर हमारी टीम और हमारे योगदानकर्ताओं के लिए यह गर्व का क्षण है। हम Koo के जरिए एक अरब भारतीयों को आवाज देने के लिए तत्पर हैं!”
 

कू ऐप 2020 में लांच, चार भारतीय भाषाओं में उपलब्ध
कू भारतीय भाषाओं में भारत का माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म है। Koo को मार्च 2020 में लॉन्च किया गया था और अब यह 4 भारतीय भाषाओं - हिंदी, कन्नड़, तमिल और तेलुगु में उपलब्ध है। भारत का सिर्फ 10% हिस्सा अंग्रेजी समझता है। बाकी 90% 100 + भारतीय भाषाएँ बोलते हैं। अपने मन की बात कहने और खुद को अभिव्यक्त करने के लिए उनके पास भारतीय भाषा के अनुकूल मंच नहीं है। Koo एक माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म है जो भारतीयों को अपनी मातृभाषा में खुद को अभिव्यक्त करने में सक्षम बनाता है।
 
Koo भारत की कुछ सबसे प्रमुख हस्तियों को भी आमंत्रित करता है ताकि उपयोगकर्ता उनका और उनके विचारों का अनुसरण कर सकें। Koo को सिर्फ 5 महीने पहले लॉन्च किया गया था और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, श्री सद्गुरु, अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ, डॉ. अश्वथ नारायण (कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री), कर्नाटक के डिप्टी कमिश्नर, सांसद तेजस्वी सूर्या, आशुतोष राणा, आशीष विद्यार्थी और कई अन्य राजनेताओं, आईएएस अधिकारियों, अभिनेताओं, अभिनेत्रियों और खेल हस्तियों ने अपने अनुयायियों के साथ संपर्क में रहने के लिए इसका उपयोग किया है।
 
कू ऐप खासियत का खजाना
Koo अपने उपयोगकर्ताओं को टेक्स्ट,ऑडियो और वीडियो का उपयोग करके अपने मन की बात कहने में सक्षम बनाता है। वे या तो लिखित में 400 कैरेक्टर्स या 1 मिनट के लघु ऑडियो या वीडियो Koo में अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। एप्लिकेशन में निम्नलिखित सुविधाएँ शामिल हैं जैसे लोग फ़ीड, प्राइवेट मैसेजिंग, अंग्रेजी से हिंदी भाषा कीबोर्ड, हिंदी समाचार फीड और हाइपर लोकल हैश टैग। Koo जल्द ही अन्य भाषाओं को भी आने वाले महीनों में लॉन्च करेगा।
 

Koo को अप्रमेय राधाकृष्ण और मयंक बिडवतका द्वारा सह-स्थापित किया गया है। वे सीरियल एंटरप्रेन्योर हैं और अपने पिछले एंटरप्रेन्योर अवतार में टैक्सीफॉरश्योर और रेडबस जैसे स्टार्टअप बनाए हैं।
 
आत्मनिर्भर ऐप चैलेंज के बारे में
अटल इनोवेशन मिशन के साथ साझेदारी में आईटी और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) - नीती आयोग ने डिजिटल इंडिया आत्मनिर्भर भारत इनोवेट चैलेंज की शुरुआत की है उन बेहतरीन भारतीय ऐप्स की पहचान करने के लिए जो पहले से ही नागरिकों द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं और उनमें अपनी सम्बंधित श्रेणियों में विश्व स्तर के पैमाने तक जाने की क्षमता है। इस इनोवेशन चैलेंज में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रयास किया गया है जहाँ भारतीय उद्यमियों और स्टार्टअप्स को वैचारिक स्तर से लेकर निरंतर तकनीकी समाधानों तक ले जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, जो न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में नागरिकों की सेवा कर सकें। यह भारत में भारत और विश्व के लिए मेक इन इंडिया का मंत्र है।

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