सरकार के इस कदम से गूगल, फेसबुक, ट्विटर के लिए खड़ी हो सकती है दिक्कत

टेक एंड गैजेट्स
Updated Jul 31, 2019 | 15:23 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

सरकार गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसी कंपनियों पर टैक्स लगाने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार एक मानक तैयार कर रही है, जिसके बाद इन कंपनियों को भारत में हुई आय पर टैक्स भरना होगा।

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सरकार लगा सकती है डिजिटल टैक्स   |  तस्वीर साभार: BCCL
मुख्य बातें
  • डिजिटल टैक्स लगाने की योजना में है सरकार।
  • फेसबुक, गूगल, ट्विटर जैसी कंपनियों को भरना होगा टैक्स।
  • यूरोपीय संघ भी बड़ी टेक कंपनियों पर टैक्स लगाने पर विचार कर रही है।

नई दिल्ली: सरकार बड़ी टेक कंपनियों पर टैक्स लगाने की तैयारी में है। इस मामले से जुड़े कई सूत्रों ने बताया कि सरकार 20 करोड़ रुपए की आय और 5 लाख की सीमा तय करने की योजना में है, इसके ऊपर की नॉन रेजिडेंट टेक्नोलॉजी कंपनियों को स्थानीय आमदनी पर डायरेक्ट टैक्स भरना होगा। सरकार के इस कदम का सीधा प्रभाव गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियों पर पड़ेगा। ये सीमाएं एसईपी (सिग्निफिकेन्ट इकोनॉमिक्स प्रजेंस) कॉन्सेप्ट का हिस्सा हैं, जो पिछले साल बजट में लाया गया था। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार एसईपी को डायरेक्ट टैक्स कोड का हिस्सा बनाने पर भी विचार कर रही है। जल्द ही इस संबंध में एक ड्राफ्ट वित्त मंत्रालय को सौंपा जा सकता है। मल्टीनेशनल टेक कंपनियों पर पर स्थानीय आय के मुकाबले बहुत कम टैक्स भरने का आरोप लगता रहा है। जबकि ऑनलाइन विज्ञापन जैसी सेवा से उनकी अच्छी खासी आमदनी होती है। 

सरकार के इस कदम की इस जानकारी ऐसे वक्त में आई है, जब वैश्विक नीतिनिर्धारक खास तौर पर यूरोपीय संघ बड़ी टेक कंपनियों के स्थानीय लाभ और आय पर टैक्स लगाने का रास्ता खोज रही है। सोमवार को वित्त सचिव अजय भूषण पांडे को लिखे गए एक पत्र में लोकल सर्किल कहा है कि भारत में 10 लाख से अधिक रजिस्टर यूजर्स या जिसने बाद 100 से ज्यादा पेड कस्टमर हो या वे जिनकी आय 10 करोड़ से ज्यादा हो, ऐसे वैश्विक कॉर्पोरेशन को यहीं बिल बनाना चाहिए। 

सीबीडीटी ने जुलाई 2018 को एक नोटिफिकेशन में एसईपी से संबंधित फ्रेम रूल के सुझाव मांगे थे, हालांकि सरकार ने अभी तक इसके अंतिम रूप नहीं दिया है। इस मामले में तेजी पिछले महीने देखने को मिली जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जी20 सदस्यों से डिजिटल कंपनियों के लाभ पर टैक्स लगाने की मुद्दा उठाया। जहां भारत एसईपी के कॉन्टेप्ट पर काम कर रहा है, वहीं यूरोपीय संघ डिजिटल रेवेन्यू पर 3 फीसदी टैक्स लगा सकता है। फ्रांस ने डिजिटल कंपनियों पर अपने टैक्स की घोषणा कर दी है।

एसईपी विदेशी कंपनियों को लोकल फर्म के आधार पर ही टैक्स लगाएगी। इस सेक्टर के एक एक्सपर्ट ने बताया कि ऐसे वक्त में जब रेवेन्यू कलेक्शन गिर रहा हो, सरकार के इस कदम से राजकोष बढ़ेगा। लेकिन इससे लोकल और ग्लोबल कंपनियों के बीच एक रेखा खींच जाएगी। गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियां यूजर्स की लोकल बिलिंग करती हैं लेकिन वे पूरे ट्रांजिक्शन को उनके भारतीय रेवेन्यू के तौर पर नहीं दिखाते हैं। वह ट्रांजेक्शन के केवल एक हिस्से को ही रिपोर्ट करते हैं, बाकि हिस्से को वे कॉस्ट के रूप में विदेशी संस्थाओं को देते हैं। 

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