पैराएथलीट दीपा मलिक ने पिता को समर्पित किया राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार

स्पोर्ट्स
Updated Aug 19, 2019 | 20:30 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

पैरालंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला दीपा मलिक को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा जाएगा। उन्होंने इस पुरस्कार को अपने दिवंगत पिता को समर्पित किया है।

deepa Malik
दीपा मलिक  |  तस्वीर साभार: Twitter
मुख्य बातें
  • दीपा मलिक और बजरंग पुनिया को मिलेगा राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार
  • दीपा ने साल 2016 में रियो पैरालंपिक में जीता था रजत पदक
  • पैरालंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं दीपा मलिक

नई दिल्ली: साल 2016 में रियो में आयोजित पैरालंपिक खेलों में रजत पदक जीतने वाली एथलीट दीपा मलिक और पहलवान बजरंग पुनिया को देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न के लिए चुना गया है। पैरा खेलों में दुनियाभर में भारत का परचम लहराने वाली दीपा मलिक ने ये पुरस्कार अपने दिवंगत पिता को समर्पित किया है। जिनका पिछले साल निधन हो गया था। 

दीपा ने बताया कि पिछले साल उनके पिता का देहांत 30 अप्रैल 2018 को हो गया था। यह राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तिथि भी थी। दीपा ने कहा, पिछले साल अप्रैल की बात है मेरे पिता कैंसर के अंतिम दौर का सामना कर रहे थे। उस दौरन उन्होंने मुझसे आखिरी सवाल पूछा था कि क्या मैंने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया? 30 अप्रैल नामांकन की आखिरी तारीख थी और उसी दिन मैंने उन्हें खो दिया।'
 
उन्होंने आगे कहा, मेरे पिता ने अपने जीवन में आखिरी चीज देखी वो मेरी खेल रत्न के नामांकन की फाइल खी। अब उसे पाकर मैं खुश हूं एक साल बाद मैं निश्चित तौर पर इसे अपने पिता को समर्पित करना चाहती हूं।

17 अगस्त को खेल पुरस्कारों के लिए बनी चयन समिति ने दीपा मलिक को और बजरंग पुनिया को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजे जाने की घोषणा की।  दीपा मलिक पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं थीं। इसके अलावा उन्होंने करियर में 58 राष्ट्रीय और 23 अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम किए हैं। उन्हें इससे पहले पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। 

दीपा मलिक ने कहा कि पुरस्कार जीतना उनका लक्ष्य नहीं है उनका लक्ष्य देश को गौरान्वित करना है। उन्होंने कहा, इस पुरस्कार मेरी कड़ी मेहनत और मेरी यात्रा को प्रमाणित किया है। पुरस्कार और ईनाम कभी मेरा लक्ष्य नहीं रहे। मेरा लक्ष्य पदक जीतकर देश का गौरान्वित करना रहा है।  

मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिव्यांगों के लिए बनाई नीतियों प्रशंसा करते हुए कहा कि इनकी वजह से मैं सशक्त बनी। अब इन्ही नीतियों की मदद से अन्य लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में काम करूंगी। उन्होंने कहा, खेल ने मुझे बहुत कुछ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई नीतियों की वजह से मैं आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनी। अब मैं इन्हीं नीतियों की मदद से अपने जैसे अन्य खिलाड़ियों को सशक्त बनाने की दिशा में काम करूंगी। और मुझे देश की सेवा करने के लिए यदि कोई जिम्मेदारी मिलेगी तो मैं उस मौके का निश्चित तौर पर लाभ उठाना चाहूंगी।'


 

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