Vat savitri vrat 2021: सूर्य ग्रहण के साथ है 2021 का वट साव‍ित्र‍ी व्रत, जानें त‍िथ‍ि, पूजा व‍िधि और मंत्र

वट सावित्री व्रत महिलाओं द्वारा किए जाने वाला व्रत है जो ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक और जेष्ठ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक रखा जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है।

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वट सावित्री व्रत 2021 कब है 

मुख्य बातें

  • वट सावित्री अमावस्या के दिन यमराज से लड़ कर सावित्री ने बचाए थे अपने पति सत्यवान के प्राण।
  • सनातन धर्म में महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • परिवार में सुख-शांति और पति की दीर्घायु के लिए महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री अमावस्या पर अपने पति सत्यवान के प्राणों को सावित्री ने यमराज से बचाया था। वट सावित्री का व्रत सौभाग्यशाली स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और घर की सुख-शांति के लिए रखती हैं। यह व्रत ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी से लेकर अमावस्या तक और ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक किया जाता है। इस व्रत में सभी व्रती वट यानी बरगद के पेड़ के चारों ओर घूमती हैं और रक्षा सूत्र बांधती हैं। कहा जाता है ऐसा करने से पति की आयु लंबी होती है। बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है और इस व्रत में वट वृक्ष बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत कुमारी, विवाहित, कुपुत्रा, सुपुत्रा, विधवा आदि स्त्रियां कर सकती हैं।

वट सावित्री अमावस्या व्रत 2021 कब है,  Vat savitri vrat 2021 date in hindi

वट सावित्री व्रत तिथि: - 10 जून 2021, गुरुवार

अमावस्या तिथि प्रारंभ: - 9 जून 2021 दोपहर 01:57

अमावस्या तिथि समाप्त: - 10 जून 2021 शाम 04:20

व्रत पारण: - 11 जून 2021, शुक्रवार


वट वृक्ष व्रत की पूजा विधि, वट सावित्री अमावस्या व्रत पूजा विधि

वट सावित्री व्रत पर सुबह प्रातः काल उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाइए और स्नान आदि करके घर में पवित्र जल का छिड़काव कीजिए। तत्पश्चात बांस की टोकरी में सात धान्य भर दीजिए ‌फिर भगवान ब्रह्मा की मूर्ति को स्थापित कीजिए। ‌अब ब्रह्मा जी के मूर्ति के वाम पार्श्व में देवी सावित्री की मूर्ति को भी साबित कीजिए। ठीक इस तरह दूसरी टोकरी में सत्यवान तथा सावित्री की मूर्ति को स्थापित कीजिए और बरगद के पेड़ के नीचे ले जाकर रख दीजिए। इसके बाद भगवान ब्रह्मा सावित्री की पूजा कीजिए।

अब, यहां बताए श्लोक के साथ देवी सावित्री को अर्घ्य दीजिए। ‌

अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोस्तुते।।

इसके बाद देवी सावित्री और सत्यवान की पूजा करके बढ़कर जग में पानी दीजिए और 

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।

श्लोक के साथ वत वृक्ष की प्रार्थना कीजिए।

वट सावित्री अमावस्या व्रत पूजा सामग्री

इस पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, फूल धूप तथा भिगोया हुआ चना इस्तेमाल करना लाभदायक है। पानी से व्रत बिस्कुट सीखिए उसके बाद वटवृक्ष के चारों और कच्चा धागा लपेटिए और 3 बार परिक्रमा कीजिए। इतना करने के बाद बड़ के पत्तों से गहने बनाइए और उन्हें पहनकर वट सावित्री की कथा सुनिए। तत्पश्चात जनों का बायना निकालिए और रुपए रखकर‌ सासु जी के चरण छूएं। अगर आपकी सास आपके पास नहीं हैं तो बायना बनाकर उन्हें पहुंचा दीजिए। वट सावित्री पूजा के बाद प्रतिदिन कुमकुम और सिंदूर से सौभाग्यवती स्त्रियों की पूजा कीजिए। पूजा संपन्न होने के बाद बांस के पात्र में वस्त्र और फल रखकर ब्राह्मणों को दान दीजिए।

वट सावित्री अमावस्या व्रत संकल्‍प मंत्र 

मम वैधव्यादिसकलदोषपरिहारार्थं ब्रह्मसावित्रीप्रीत्यर्थं
सत्यवत्सावित्रीप्रीत्यर्थं च वटसावित्रीव्रतमहं करिष्ये।

इस मंत्र का जाप करते हुए संकल्प लीजिए और उपवास रखिए।

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