Pitru Paksha 2019: पितृ पक्ष में प्रेग्नेंट महिलाएं रखें इन खास बातों का ध्यान

व्रत-त्‍यौहार
Updated Sep 13, 2019 | 20:07 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Pitru Paksha 2019 Dos And Don'ts For Pregnant Women: पितृ पक्ष 13 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। ये 28 सितंबर तक चलेंगे। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जानिए क्या है ये बातें।

Pitru Paksha
Pitru Paksha 2019 

मुख्य बातें

  • पितृ पक्ष में पितृ लोक के द्वार खुलते हैं
  • पितृ पक्ष में पति-पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए
  • पितृ पक्ष में गर्भवती स्त्रियों को भी खास सावधानी बरतनी की जरूरत है

नई दिल्ली. पितृ पक्ष 13 सितंबर यानी शुक्रवार से शुरू हो गए हैं।  पितृ पक्ष में हम अपने पूर्वजों का जो अब इस दुनिया में नहीं हैं उनका श्राद्ध करते हैं। इन श्राद्ध को करते वक्त कुछ नियमों को याद रखना होता है। इसके अलावा पितृ पक्ष में कुछ काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए। 

पितृ पक्ष में पितृ लोक के द्वार खुलते हैं। सभी पितर धरती पर आते हैं। पितृ पक्ष में बहुत सी सावधानी बरतनी होती है। वहीं, कुछ गलतियों के कारण पितृ दोक्ष का भी खतरा होता है। पितृ दोष या पितृदेव को रुष्ट करने से गरीबी और दूसरी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।   

पितृपक्ष में खाने-पीने का खास ध्यान रखें। 16 दिनों तक चलने वाले इस पक्ष में आप जितना संभव हो मांस या शराब से बिल्कुल दूर रहे हैं। इसके अलावा आप किसी भी तरह के बासी खाना खाने से बचें। खाने के अलावा इस दौरान कपड़े खरीदने से भी बचें। 

पितृ पक्ष में नहीं बनाएं शारीरिक संबंध 
पितृ पक्ष में पति-पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए। इस दौरान ब्रह्मचर्य का भी पालन करना जरूरी है। इसके अलावा भोग विलास की चीजों से भी बचें। वहीं, गर्भवती स्त्रियों को भी खास सावधानी बरतनी की जरूरत है। 

पितृ पक्ष के दौरान गर्भवती महिला को मांस का सेवन करने से बचना चाहिए। मांस का सेवन करने से पितरों का दुख पहुंचता है। इसके अलावा पितृ पक्ष में गर्भवती महिलाओं को जंगल या शमशान जैसी जगहों में नहीं जाना चाहिए।

   
दो प्रकार के होते हैं श्राद्ध 
श्राद्ध दो प्रकार के होते हैं। पार्वण श्राद्ध और एकोदिष्ट श्राद्ध। आश्विन कृष्ण के पितृपक्ष में जो श्राद्ध किया जाता है वह पार्वण श्राद्ध कहा जाता है। पार्वण श्राद्ध पुर्वजों के मृत्यु की तिथि के दिन किया जाता है।

पितरों को पिंडदान करने वाला गृहस्थ दीर्घायु, यशस्वी होता है। आपको बता दें कि इस साल 13 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा। वहीं,14 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध होगा। 28 सितंबर को पितृ अमावस्या है। पितृ अमावस्या के दिन किसी पूर्वज का श्राद्ध किया जा सकता है।    

पितृपक्ष की श्राद्ध तिथि 2019

  • 13 सितंबर -पूर्णिमा श्राद्ध
  • 14 सितंबर-प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध
  • 15 सितंबर-द्वितीया तिथि का श्राद्ध
  • 17 सितंबर-तृतीया तिथि का श्राद्ध
  • 18 सितंबर-चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
  • 19 सितंबर-पंचमी तिथि का श्राद्ध
  • 20 सितंबर-ख़ष्ठी तिथि का श्राद्ध
  • 21 सितंबर-सप्तमी तिथि का श्राद्ध
  • 22 सितंबर-अष्टमी तिथि का श्राद्ध
  • 23 सितंबर-नवमी तिथि का श्राद्ध
  • 24 सितंबर-दशमी तिथि का श्राद्ध
  • 25 सितंबर-एकादशी तथा द्वादशी तिथि का श्राद्ध। संतों तथा महात्माओं का श्राद्ध
  • 26 सितंबर-त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
  • 27 सितंबर-चतुर्थी का श्राद्ध
  • 28 सितंबर-अमावस्या, सर्व पितृ श्राद्ध रहेगा।
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