Sheetala Ashtami: चेचक, चिकन पॉक्स जैसी बीमारियों से राहत देती हैं मां शीतला, जानिए इस साल कब है शीतला अष्टमी?

सनातन धर्म में शीतला अष्टमी बहुत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। शीतला अष्टमी को कई प्रांतों में बसोडा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। घर की सुख-शांति और आरोग्य जीवन के लिए इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है।

Sheetala ashtami 2021 kab hai
शीतला अष्टमी 2021 कब है 

मुख्य बातें

  • घर की सुख-समृद्धि और सेहत को दुरुस्त रखती हैं माता शीतला।
  • हर वर्ष रंग वाली होली के 8 दिन बाद मनाई जाती है शीतला अष्टमी।
  • अष्टमी से एक दिन पहले बनाया जाता है भोजन, खाया जाता है बासी खाना।

मुंबई: हिंदू पंचांग के अनुसार, होली के पर्व के 8 दिन बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर माता शीतला की पूजा की जाती है जिसे बसोडा पूजा या शीतला अष्टमी कहा जाता है। अधिकतर यह तिथि होली के 8 दिन बाद पड़ती है लेकिन कई लोग शीतला अष्टमी होली के बाद पहले सोमवार या शुक्रवार को मनाते हैं। भारत के उत्तरी राज्यों समेत गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी शीतला अष्टमी श्रद्धा पूर्वक मनाई जाती है।

गुजरात में बसोडा पूजा की ही तरह कृष्ण जन्माष्टमी से एक दिन पहले शीतला सातम मनाते हैं। शीतला सातम माता शीतला को समर्पित है और उस दिन ताजा भोजन को ग्रहण नहीं किया जाता है और ना ही घरों में भोजन पकाया जाता है।

मान्यताओं के अनुसार, इस अष्टमी पर माता शीतला की पूजा करने से चेचक, चिकन पॉक्स और खसरा जैसी बीमारियां ठीक होती हैं। आरोग्य जीवन प्राप्त करने के लिए भी लोग इस दिन माता शीतला की पूजा करते हैं। यहां जानिए, साल 2021 में शीतला अष्टमी या बसोडा पूजा कब है।

शीतला अष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त (Sheetala Ashtami 2021 Shubh Muhurat)
शीतला अष्टमी तिथि- 4 अप्रैल 2021, रविवार
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त- सुबह 06:08 से लेकर शाम के 06: 41 मिनट तक 
अष्टमी तिथि प्रारंभ- 4 अप्रैल 2021 (सुबह 04:12 से लेकर)
अष्टमी तिथि समाप्त- 5 अप्रैल 2021 (सुबह 02:59 तक)

क्या होता है शीतला अष्टमी पर?
माता शीतला की पूजा करना बेहद लाभदायक माना जाता है। इस दिन विधिवत तरीके से माता शीतला की पूजा की जाती है। शीतला अष्टमी के दिन घरों में खाना पकाने के लिए आग नहीं जलाया जाता है। इसीलिए लोग शीतला अष्टमी से एक दिन पहले भोजन तैयार कर लेते हैं और शीतला अष्टमी पर बासी भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन लोग धार्मिक कार्यों में भी लीन रहते हैं और दान-पुण्य के कार्य करते हैं। 

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