Maha Bharani Shradh: मुक्त आत्मा को शांति दिलाने के लिये आज करें भरणी श्राद्ध, ये रहा पूजा का शुभ मुहूर्त 

व्रत-त्‍यौहार
Updated Sep 18, 2019 | 06:30 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

भरणी श्राद्ध करने के लाभ गया श्राद्ध के बराबर हैं। आमतौर पर भरणी नक्षत्र श्राद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद एक बार किया जाता है लेकिन धर्मसिंधु के अनुसार यह हर साल किया जा सकता है।

Pitru Paksha
Pitru Paksha   |  तस्वीर साभार: Thinkstock

मुख्य बातें

  • भरणी श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है
  • भरणी श्राद्ध करने के लाभ गया श्राद्ध के बराबर हैं
  • भरणी श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को बाल कटाने और दाढ़ी रखने से बचना चाहिए

Maha Bharani Shradh: भरणी श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है, जब भरणी नक्षत्र अपरान्ह काल के बीच होता है। भरणी नक्षत्र महालया पक्ष के दौरान या तो चतुर्थी तिथि या पंचमी तिथि को आता है। भरणी श्राद्ध को चौथ भरणी या भरणी पंचमी के रूप में जाना जाता है। भरणी श्राद्ध को महा भरणी श्राद्ध के रूप में जाना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान नक्षत्र भरणी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मृत्यु के देवता यम द्वारा शासित है।

भरणी श्राद्ध करने के लाभ गया श्राद्ध के बराबर हैं। आमतौर पर भरणी नक्षत्र श्राद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद एक बार किया जाता है लेकिन धर्मसिंधु के अनुसार यह हर साल किया जा सकता है। पितृ पक्ष श्राद्ध पावन श्राद्ध (पार्वण श्राद्ध) है और इसे करने का शुभ समय कुतप मुहूर्त या रोहिना मुहूर्त होता है। तर्पण श्राद्ध के अंत में किया जाता है। अब आइये जानते हैं भरणी श्राद्ध का शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि- 

भरणी श्राद्ध 18 सितंबर, 2019 का शुभ  मुहूर्त :

  • कुतुप मुहूर्त : 11:57 AM to 12:45 PM
  • समयावधि : 48 मिनट
  • रोहिणा मुहूर्त : सुबह 12.00 से 13.34 
  • अपराह्रन काल : 13.34 से 03:59
  • समयावधि : 2 घंटे 25 मिनट

भरणी श्राद्ध के दौरान करें ये काम: 
भरणी श्राद्ध में किया गया अनुष्ठान बेहद शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका पालन करने वाले व्यक्ति को अनुष्ठान की पवित्रता को बनाए रखना चाहिए। भरणी श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को बाल कटाने और दाढ़ी रखने से बचना चाहिए। साथ ही उसे अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए। 

यह अनुष्ठान इसलिये भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्राह्मणों द्वारा खाया गया भोजन, मृत आत्माओं तक पहुंचता है। भरणी श्राद्ध पर, कौवे को भी वही भोजन खिलाना चाहिए क्योंकि उन्हें भगवान यम का दूत माना जाता है। कौवा के अलावा, कुत्ते और गाय को भी खाना खिलाया जाता है। 

धार्मिक रूप से और पूरी श्रद्धा के साथ भरणी श्राद्ध अनुष्ठान करने से मुक्त आत्मा को शांति मिलती है। और बदले में वे अपने वंशजों को शांति, सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करते हैं।

 


 

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