Jivitputrika Vrat 2019: संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जला रखा जाता है ये व्रत, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि

व्रत-त्‍यौहार
Updated Sep 19, 2019 | 12:34 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

जितिया व्रत उत्तर प्रदेश और बिहार में रखा जाता है। इस व्रत में माएं रात में सरगी खा कर व्रत की शुरुआत करती हैं। यहां जानें व्रत का शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि...

Jivitputrika Vrat
Jivitputrika Vrat   |  तस्वीर साभार: Instagram

मुख्य बातें

  • यह व्रत हर साल आश्विन माह की अष्टमी तिथि को पड़ता है
  • जितिया व्रत उत्तर प्रदेश और बिहार में रखा जाता है।
  • इस व्रत में माएं रात में सरगी खा कर व्रत की शुरुआत करती हैं

हिंदू धर्म में ऐसे अनेक तीज-त्‍यौहार और व्रत हैं जो संतान की लंबी आयु और बरकत के लिये रखे जाते हैं। ऐसा ही एक व्रत है जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत है जिसे माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना हेतु रखती हैं। यह व्रत हर साल आश्विन माह की अष्टमी तिथि को पड़ता है जो कि निर्जला रखा जाता है। जितिया व्रत उत्तर प्रदेश और बिहार में रखा जाता है। इस व्रत में माएं रात में सरगी खा कर व्रत की शुरुआत करती हैं। 

इस वर्ष यह व्रत 22 सितंबर को रखा जायेगा। इस व्रत को करते समय गोबर-मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा कुश के जीमूतवाहन व मिट्टी -गोबर से सियारिन व चूल्होरिन की प्रतिमा बनाकर व्रती महिलाएं जिउतिया पूजा करेंगी। इस व्रत में सतपुतिया की सब्जी का भी विशेष महत्व है। पृत पक्ष के दौरान पड़ने वाले इस व्रत में रात को बने पकवान में से पितरों, चील या गाय आदि को का अंश भी निकाला जाता है। 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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जितिया शुभ मुहूर्त 22 सितंबर
प्रातः से 07:50 सुबह
दिन में 2 बजकर 10 मिनट तक 
प्रदोष काल-सायं 04:27 से रात्रि 07:33

जितिया व्रत की पूजा विधि

  • यह व्रत निर्जला रखा जाता है। सूर्योदय के पहले माताएं कोई मीठा चीज गुड़ इत्यादि खा लेती हैं। 
  • प्रायः गुड़ का ही सेवन करके जल पी लेती हैं फिर अगले दिन ही व्रत का पारण होता है। 
  • माताएं अष्टमी को प्रातः उठकर स्नान ध्यान के बाद मंदिर में बैठकर माता की पूजा करके पुत्र को बुलाती हैं।
  • पुत्र के लिए किए गए इस व्रत में माता पुत्र के गले में एक लाल धागा पहनाती है। 
  • पुत्र माता का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करता है। वह लाल धागा पुत्र की लंबी उम्र के लिए होता है। उस धागे में माता का आशीर्वाद होता है।
  • अब माता पूजा घर से उठकर पूरे दिन अष्टमी तक निराजल व्रत रहती है। 
  • इस कठिन व्रत में जो कि बिना कुछ खाये पीए रखा जाता है केवल एक ही मनोकामना होती है कि मेरा पुत्र शतायु हो। 

वृद्ध और रोगी माताएं फलाहार व्रत कर सकती हैं। ऐसी माताएं पूजा पाठ सब विधि अनुसार ही करेंगी लेकिन स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए वो फलाहारी व्रत रख सकती हैं। 

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