Indira Ekadashi 2019: पृत पक्ष में खास महत्‍व रखती है इंदिरा एकादशी, इस तरह व्रत रखकर पितरों को दिलाएं मोक्ष

व्रत-त्‍यौहार
Updated Sep 24, 2019 | 08:55 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

पुराणों में बताया गया है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए यह बहुत फलदायी होता है। इंदिरा एकादशी के दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से पितरों के भी सारे दोष खत्म हो जाते हैं।

Indira Ekadashi
Indira Ekadashi  

Ekadashi Shradh 2019: पितरों का श्राद्ध करने का पर्व पितृ पक्ष 28 सितंबर को मनाया जाएगा। लेकिन पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का भी बेहद खास महत्व है। शास्त्रों में बताया गया है कि इंदिरा एकादशी के दिन विधिवत पूजा पाठ करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

इंदिरा एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और पूरे दिन उपवास रखा जाता है। इस व्रत को विधि विधान से करने पर मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। इस वर्ष इंदिरा एकादशी 25 सितंबर को पड़ रही है। आइये जानते हैं इंदिरा एकादशी व्रत क्यों है इतना खास।

इसलिए खास है यह एकादशी व्रत
पितृपक्ष को पितरों की मुक्ति का पखवारा माना जाता है और इंदिरा एकादशी इसी पखवारे में पड़ती है। कहा जाता है कि इंदिरा एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से पितरों को कष्टों से मुक्ति मिलती है और उनकी आत्मा इधर उधर नहीं भटकती है।

Anant Chaturdashi

इंदिरा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त 
एकादशी तिथि आरंभ: 24 सितंबर 2019 को शाम 04 बजकर 52 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्‍त: 25 सितंबर 2019 को दोपहर 02 बजकर 09 मिनट तक
द्वादशी को पारण का समय: 26 सितंबर 2019 को सुबह 06 बजकर 15 मिनट से सुबह 08 बजकर 38 मिनट तक

इंदिरा एकादशी व्रत का महत्व
पुराणों में बताया गया है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए यह बहुत फलदायी होता है और व्यक्ति की मृत्यु के बाद इस व्रत के प्रभाव से उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इंदिरा एकादशी के दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से पितरों के भी सारे दोष खत्म हो जाते हैं।

इंदिरा एकादशी की व्रत कथा
सतयुग में महिष्मति नामक नगर में इंद्रसेन नाम का एक प्रतापी राजा था। वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। एक दिन नारद मुनि राजा के दरबार में आए और उन्होंने राजा को बताया कि मैंने तुम्हारे पिता को यमलोक में देखा। तुम्हारे पिता ने बताया कि एकादशी का व्रत भंग होने के कारण उन्हे नरक में जगह मिली है।  उन्होंने तुम्हारे लिए संदेश भेजा है कि अगर तुम एकादशी का व्रत करो तो उन्हें स्वर्गलोक की प्राप्ति होगी। यह सुनकर राजा इंद्रसेन ने अपने पूरे परिवार के साथ इंदिरा एकादशी का व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से राजा के पिता को स्वर्ग प्राप्त हुआ। तभी से इस व्रत पितरों को कष्टों से मुक्ति दिलाने के लिए किया जाता है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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इंदिरा एकादशी व्रत की विधि

  • इस व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से ही किया जाता है और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सिर्फ एक बार भोजन किया जाता है।
  • इसके बाद इंदिरा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • विधिपूर्वक पितरों का श्राद्ध करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं और गरीबों को दान दें।
  • इसके बाद गाय को भोजन खिलाएं।
  • भगवान विष्णु को धूप, फूल, मिठाई, फल चढ़ाएं और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें।
  • द्वादशी तिथि के दिन फिर से ब्राह्मणों को भोजन कराएं और परिवार के साथ बैठकर मौन धारण करके स्वयं भोजन करें।

इंदिरा एकादशी व्रत के नियमों का पालन करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है।

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