आपकी राशि में छिपा है कल्याणकारी रंग, राशि के मुताबिक रंगों और गुलाल से खेलें होली

colors for each Zodiac signs: होली का पर्व प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। होली पर्व में अगर आप अपनी राशि के मुताबिक रंग और गुलाल खेंले तो उसका महत्व और बढ़ जाता है।

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अगर आप राशि के मुताबिक होली के रंगों और गुलाल का इस्तमाल करें तो इसका महत्व बढ़ जाता है। (तस्वीर के लिए साभार- iStock ) 

मुख्य बातें

  • होली का पर्व 29 मार्च को मनाया जाएगा
  • होलिका दहन एक दिन पहले यानी 28 मार्च को है
  • राशि के मुताबिक रंगों से खेलना शुभकारी होता है

नई दिल्ली : होली एक ऐसा पर्व है जहां रंगों और गुलाल की मस्ती में सबकुछ सराबोर होता है। होली के दिन रंग और गुलाल प्रेम,मस्ती और भाइचारे का अद्भुत संदेश देते हैं। दरअसल यह एक ऐसा पर्व है जो मन के किसी भी मलाल को दूर कर उसे खुशियों के गुलाल में सराबोर करता है।

होली के दिन हम सभी रंग लगाते हैं और गुलाल खेलते है। ऐसे में अगर आप राशि के मुताबिक होली के रंगों और गुलाल का इस्तमाल करें तो इसका महत्व बढ़ जाता है। दरअसल हर राशि का एक खास रंग होता है और उस रंग और गुलाल से होली खेलना आपके लिए परम कल्याणकारी होती है। इस बार होली का पर्व 29 मार्च को है और होलिका दहन 28 मार्च को होगा। 


राशि अनुरूप रंगों व गुलालों से खेलें होली

सिद्धान्त यह कि राशियेश के स्वामी ग्रह का रंग व उसके मित्र ग्रहों का रंग हो। ज्योतिष में सब कुछ तार्किक व नियम अनुरूप ही होता है। अब सिंह राशि का स्वामी सूर्य है। सूर्य का रंग लाल है। शनि का नीला या काला। दोनों शत्रु ग्रह हैं। तो सिंह राशि का जातक काले या नीले रंग का प्रयोग न करे तो बेहतर है। लाल रंग शुभ है उसके लिए। आइए जानते हैं कि किस राशि को किस रंग की होली खेलनी चाहिए। 

  1. मेष-लाल व पीला
  2.  वृष-सफेद व नीला
  3. मिथुन-हरा व नीला
  4. कर्क-सफेद व पीला
  5. सिंह-नारंगी व पीला
  6. कन्या-हरा व सफेद
  7. तुला-सफेद व नीला
  8. वृश्चिक-लाल व पीला
  9. धनु-पीला व नारंगी
  10. मकर-नीला व सफेद
  11. कुम्भ-नीला व हरा
  12. मीन-पीला व सफेद

होली प्रेम एवं भाईचारे का महान पर्व है। प्रेम के रंग में एक अलग मस्ती होती है। होली प्रेम,मस्ती,स्थितिप्रज्ञता,उन्मुक्तता व परिपूर्णता का उत्सव है जिसे हर साल मनाया जाता है। मस्ती प्रेम के रंग व उस भाव की हो जहां हम सर्वस्व अर्पित करते हों। भगवान कृष्ण ने गीता के 18 वें अध्याय में शरणागति की बात की है।

भगवान के प्रति समर्पण ही उसकी सर्वोच्च भक्ति होती है। प्रेम की परिपूर्णता समर्पण में है।परमब्रम्ह भगवान श्रीकृष्ण व जगत की आधार माता राधा की भक्ति व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का यह महान पर्व मंगलमय व आनंदमय उत्सव की भांति मनाएं।

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