Shradh Karm: बिहार के प्रेतशिला पर्वत पर पिंडदान करने का है खास महत्व, पितरों को मिलती है प्रेतयोनि से मुक्‍ति

धार्मिक स्‍थल
Updated Sep 13, 2019 | 09:00 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

गया स्थित प्रेतशीला का बहुत अधिक महत्व होने के कारण देश के कोने कोने से लोग श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों को पिंडदान करने के लिए यहां जमा होते हैं।

 Pretshila in Bodhgaya
Pretshila in Bodhgaya  |  तस्वीर साभार: Instagram

Pretshila in Bodhgaya: हिंदू धर्म में प्रत्येक वर्ष पूरे विधि विधान से पितरों का श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष पखवारा 15 दिनों का होता है और पूरे पखवारे भर देश के विभिन्न स्थानों पर लोग नदियों में स्नान करके अपने पूर्वजों को जल तर्पण करते हैं। मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों का पिंडदान करने से उन्हें मृत्युलोक से मुक्ति मिलती है और उनकी आत्मा स्वर्ग में पहुंचती है।

बिहार के पटना से 104 किमी दूर गया में पितृ पक्ष मास में पितरों के पिंडदान के लिए भारी संख्या में लोग आते हैं। इस वर्ष श्राद्ध पक्ष 12 सितंबर यादि आज से शुरू हो गया है। कहा जाता है कि गया में पितरों का श्राद्ध इसलिए किया जाता है क्योंकि यहां रहस्यों से भरी एक प्राचीन प्रेतशीला स्थित है और श्राद्ध पक्ष में हमारे पूर्वज यहां से पिंडदान ग्रहण करके परलोक जाते हैं। आइये जानते हैं प्रेतशीला के बारे में कुछ खास बातें।

प्रेतशिला में पिंडदान से प्रेतयोनि से मिलती है मुक्ति, जानें खास बातें

  1. प्रेतशीला कोई इमारत नहीं बल्कि गया शहर में स्थित 876 फीट ऊंचा पर्वत है। इस पर्वतशीला पर पिंडदान करने का बहुत महत्व है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति प्रेतशीला पर आकर अपने पूर्वजों का पिंडदान करता है उसके पूर्वज सभी कष्टों से मुक्त हो जाते हैं और अगले जन्म में मनुष्य योनि में उनका जन्म होता है।
  2. इस पर्वतशीला को लोक एवं परलोक के बीच की कड़ी माना जाता है। प्रेतशीला रहस्यों से भरा है। कहा जाता है कि प्रेतशीला के पत्थरों में विचित्र प्रकार की कुछ दरारें एवं छिद्र हैं। इन्हीं दरारों से आकर पूर्वज पिंडदान ग्रहँ करते हैं और कष्टकारी योनियों से मुक्त हो जाते हैं।
  3. प्रेतशीला पर्वत पर करोड़ों आत्माओं का वास है। सूरज डूबने के बाद ये आत्माएं विशेष प्रकार की ध्वनि करती हैं। इसके अलावा इनके प्रतिविंब को भी देखा जा सकता है। यह हमेशा से ही लोगों के आश्चर्य का केंद्र है।
  4. इस पर्वतशीला पर एक ऐसी वेदी बनी हुई है जिसके ऊपर भगवान विष्णु के पैरों के चिह्न हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार गयासुर नामक राक्षस की पीठ पर भगवान विष्णु बड़ा सा पत्थर रखकर उसके ऊपर खड़ा हुए थे। गयासुर को वरदान प्राप्त था कि प्रेतशीला से कोई भी जीव नरक में नहीं जाएगा। यही कारण है कि यहां पितरों को पिंडदान किया जाता है जिसके कारण उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

गया स्थित प्रेतशीला का बहुत अधिक महत्व होने के कारण देश के कोने कोने से लोग श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों को पिंडदान करने के लिए यहां जमा होते हैं।

 

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