Ramayana: अंगद ने सबसे पहले माता सीता का लगाया था पता, पहली मुलाकात में ही रावण को चटाई थी धूल

अंगद राजा बाली और तारा के बेटे और सुग्रीव के भतीजे थे। उन्होंने माता सीता को ढ़ूढ़ने में भगवान राम की बड़ी मदद की थी। जानते हैं रामायण में अंगद की भूमिका के बारे में-

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अंगद कौन थे रामायण में क्या थी उनकी भूमिका 

मुख्य बातें

  • अंगद राजा बाली और तारा के बेटे और सुग्रीव के भतीजे थे
  • माता सीता को ढ़ूढ़ने में अंगद ने भगवान राम की बड़ी मदद की थी
  • जब वानरों ने माता सीता को ढ़ूढ़ने का मिशन शुरू किया तो इसमें अंगद को बड़ी कमान सौंपी गई

रामायण में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, रावण के अलावा एक अन्य चरित्र की भी बड़ी भूमिका थी। उनका नाम है अंगद जो वानरकुल के थे। अंगद राजा बाली और तारा के बेटे और सुग्रीव के भतीजे थे। उन्होंने माता सीता को ढ़ूढ़ने में भगवान राम की बड़ी मदद की थी। अपनी मृत्यु के दौरान बालि ने अपने भाई सुग्रीव से ये वादा लिया था कि वह उनकी मौत के पश्चात उनके बेटे अंगद की अपने बेटे की तरह रक्षा करेंगे। 

इसके बाद सुग्रीव ने अंगद को किष्किंधा का राजकुमार बनाया था। जब वानरों ने माता सीता को ढ़ूढ़ने का मिशन शुरू किया तो इसमें अंगद को बड़ी कमान सौंपी गई। जब उन्हें सारी चीजें समझा दी गई तो अंगद को वानरों की टीम का मुखिया बनाया गया। उन्हें पता लगाया कि सीता को दक्षिण भारत के किसी हिस्से में अपहरण कर रखा गया है तो उन्होंने दक्षिण भारत का एक-एक चप्पा-चप्पा समुद्र किनारे रामेश्वरम तक छान मारा। 

जब माता सीता का पता चल गया कि उन्हें लंका में छुपा कर रखा गया है तो पहले भगवान राम ने रावण से बीतचीत कर सीता को वापस लाने का फैसला किया क्योंकि वे युद्ध नहीं चाहते थे। इस दौरान संदेशवाहक की तरह भी अंगद को ही रावण के पास भेजा गया। उन्होंने जाकर रावण से कहा कि वे राम का संदेश लेकर आए हैं कि वे सीता को वापस लौटा दें इस तरह से युद्ध टाल दिया जाएगा।

उन्होंने यहां रावण को मनाने की हर तरकीब अपनाई लेकिन लंकापति रावण अपने निश्चय पर अटल था और उन्होंने शांतिपूर्वक सीता को लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने रावण को एक अंतिम चैलेंज दिया। उन्होंने रावण के दरबार में अपना पैर जमाते हुए कहा कि अगर उसका कोई भी सैनिक या राक्षस उसके पैर वहां से हटा दे तो राम अपनी हार मान लेंगे और सीता को लिए बिना ही वापस चले जाएंगे।

इस चैलेंज के बाद रावण के एक-एक राक्षसों ने अंगद के पास आकर उसका पैर वहां से हटाने की पूरी कोशिश की लेकिन कोई भी कामयाब नहीं हुआ। इस पर रावण को बेइज्जती का एहसास हुआ तो वह भगवान राम को उल्टा सीधा बोलने लगा। इसके बाद खुद रावण ने भी अंगद के पैर को हटाने की कोशिश की लेकिन वह भी कुछ नहीं कर पाया और उसका मुकुट सिर से नीचे गिर गया।

इस पर अंगद ने उसका मुकुट लेकर अपने हाथों से उस दिशा में उठाल दिया जिधर भगवान राम, लक्ष्मण के साथ उनका इंतजार कर रहे थे। रावण का मुकुट देखकर भगवान राम को तसल्ली हुई कि अंगद ने उसे अपने वश में कर लिया है और अंगद को कोई क्षति नहीं पहुंची है। उधर रावण ने अपने राक्षसों से कहा कि वह उसे पकड़ ले और उसका वध कर दे लेकिन अंगद उसके चंगुल से बच कर भाग निकले। इसके बाद जब रामायण का युद्ध हुआ था तब अंगद ने रावण के बेटे देवांतक का वध किया था।

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