पितृ पक्ष 2020 का पूरा कैलेंडर, जानिए क्या है इस दौरान श्राद्ध करने का महत्व

पितृ पक्ष 2020 श्राद्ध की तिथियां: पितृ पक्ष पूर्णिमा के दिन से शुरू होता है। यहां जानिए 2020 में पितृ पक्ष की तारीखों और 16 दिन के अनुष्ठान का महत्व।

Pitru Paksha 2020 calendar
पितृ पक्ष 2020  |  तस्वीर साभार: Instagram

मुख्य बातें

  • पूर्णिमा को 1 सितंबर से शुरु होगी पितृ पक्ष की अवधि
  • पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किए जाते हैं अनुष्ठान
  • यहां देखिए पितृ पक्ष का पूरा कैलेंडर और जानिए इसका महत्व

मुंबई: हिंदू कैलेंडर में पितृ पक्ष एक ऐसी अवधि है जब लोग अपने मृत पूर्वजों को श्राद्ध और तर्पण अनुष्ठान करके श्रद्धांजलि देते हैं। अमावसंत कैलेंडर के अनुसार, पितृ पक्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष के महीने में आता है और जो लोग पूर्णिमांत कैलेंडर का पालन करते हैं, वे आश्विन के महीने में इसका अनुष्ठान करेंगे।

दिलचस्प बात ये है यहां केवल महीनों के नाम अलग-अलग हैं, लेकिन तारीख और समय एक ही है। पितृ पक्ष पूर्णिमा के दिन से शुरू होता है, जिसे तमिल में पूनम या पूर्णमनी भी कहा जाता है। 2020 में पितृ पक्ष की तारीखों और महत्व को जानने के लिए आगे पढ़ें।

पितृ पक्ष 2020 श्राद्ध तिथि (Pitru Paksha shradh Tithi and dates calender):

पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष की तिथियां इस प्रकार हैं:

क्रमांक  तारीख दिन
1. 2 सितंबर पूर्णिमा श्राद्ध
2 3 सितंबर प्रतिपदा श्राद्ध
3 4 सितंबर द्वितीया श्राद्ध
4 5 सितंबर तृतीया श्राद्ध
5 6 सितंबर चतुर्थी श्राद्ध
6 7 सितंबर पंचमी श्राद्ध
7 8 सितंबर षष्टि श्राद्ध
8 9 सितंबर सप्तमी श्राद्ध
9 10 सितंबर अष्टमी श्राद्ध
10 11 सितंबर नवमी श्राद्ध
11 12 सितंबर दशमी श्राद्ध
12 13 सितंबर एकादशी श्राद्ध
13 14 सितंबर द्वादशी श्राद्ध
14 15 सितंबर त्रियोदशी श्राद्ध
15 16 सितंबर चतुर्दशी श्राद्ध
16 17 सितंबर    सर्व पित्र अमावस्या श्राद्ध 

पितृ पक्ष का महत्व (Pitru Paksha 2020 Significance)

पितृ पक्ष पूर्णिमा के दिन या उसके अगले दिन शुरू होता है। यह चंद्र चक्र के वानिंग चरण की शुरुआत को चिह्नित करता है। यह हिंदू कैलेंडर में 16 दिनों की अवधि है जिसे पितृ पक्ष कहा जाता है। इसमें लोग अपने मृत रिश्तेदारों / पूर्वजों को सम्मान देने के लिए तर्पण और श्राद्ध अनुष्ठान करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि मृतक की असंतुष्ट आत्माएं अपने परिवार के सदस्यों को देखने के लिए पृथ्वी पर लौट आती हैं। इसलिए, उनका मोक्ष सुनिश्चित करने के लिए लोग अनुष्ठान करते हुए पिंड दान (पके हुए चावल और काले तिलों से युक्त भोजन अर्पित करने की विधि) करते हैं।

पिंड दान से तात्पर्य उन लोगों को आनंद और संतोष देने की रस्म से है, जो मृत हैं। प्रार्थना की पेशकश की जाती है और आत्माओं को शांत करने के लिए जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र से छुटकारा पाने में मदद के लिए अनुष्ठान किए जाते हैं।

पितृ पक्ष या पितरों के श्राप वाले लोगों के लिए पितृ पक्ष एक महत्वपूर्ण अवधि है। लोग श्राद्ध अनुष्ठान करते हैं और कौवे को भोजन कराते हैं (माना जाता है कि यह मृतकों का प्रतिनिधि है)।

मान्यताओं के अनुसार लोगों की ओर से दिए गए भोजन को स्वीकार करके कौवा संकेत देता है कि पूर्वज प्रसन्न हैं। हालांकि अगर कौवा भोजन नहीं करता, तो यह इंगित करता है कि मृतक नाराज हैं।

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